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उजले भविष्य की अभिवंदना
आचार्य श्री भिक्षु का यह परम, पावन, पवित्र तेरापंथ धर्मसंघ। छोटे से केलवा में भाव दीक्षा से प्रारंभ हुआ आज दुनिया के अनेकों देशों में अपना अमिट आलेख लिख चुका है। धर्मसंघ के प्रत्येक आचार्यों ने अपनी साधना,समयज्ञता, प्रज्ञा, पुरुषार्थ, दूरदर्शी चिंतन, परम पवित्र आचार, सहज सरल व्यवहार, मानव-कल्याणकारी कार्य - अवदानों से धर्मसंघ को सागर सी गहराई एवं हिमालय सी ऊंचाई प्रदान की है।
भगवान महावीर के अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह के सिद्धांत तथा युग की अपेक्षा के अनुसार अणुव्रत आंदोलन, जीवन विज्ञान, प्रेक्षाध्यान जैसे अवदान तथा साहित्य की यथार्थ धारा ने तेरापंथ का परचम सात समंदर पार तक लहराया है। हमारा सौभाग्य हमने आचार्य श्री तुलसी-आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की जोड़ी को देखा।आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी- आचार्य श्री महाश्रमणजी की जोड़ी को देखा। वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमणजी एवं युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी जोड़ी को दीर्घ काल तक देखते रहेंगे। हमने भगवान महावीर स्वामी गणधर गौतम स्वामी की जोड़ी को देखा या ना देखा ज्ञात नही। हमने आचार्य श्री भिक्षु-युवाचार्य श्री भारमल जी की जोड़ी को देखा या ना देखा ज्ञात नही। ऐसा लगता है कि भगवान महावीर स्वामी- गणधर गौतम स्वामी, आचार्य श्री भिक्षु- युवाचार्य भारमाल जी, के गुणों का प्रतिरुप आचार्य परम्परा से होते हुए वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमणजी एवं युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी में देख रहे हैं। पांचवें आरे में चौथा आरे के परम पावन आचार्य प्रवर एवं युवाचार्य श्री को देख रहे है।जिनका जीवन अपने आप में ही एक प्रेरक संदेश है।
आचार्य श्री महाश्रमणजी ने शुभ दिन,शुभ घड़ी, में शुभ भविष्य धर्मसंघ को देकर निश्चिंत कर दिया। न केवल उन्होंने अपना उत्तराधिकारी घोषित कर उत्तरदायित्व निभाया अपितु संघ एवं मानवजाति को एक अप्रतिम,अद्वितीय, व्यक्तित्व प्रदान किया।अपनी पारखी नजरों से परख कर तराश तराश कर जो अनमोल रत्न बनाया उसे संघ के मुकुट पर स्थापित किया है। जिसमें विनय समर्पण एवं ज्ञान की त्रिवेणी है।सहज सरल व्यवहार, पावन पवित्र आचरण, एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण संस्कार है। उनकी निश्चल मुस्कान, तेजस्विता युक्त आभामंडल को देखकर व्यक्ति परम आनन्द प्राप्त करता है। प्रभु महावीर का यह शासन आचार्य श्री महाश्रमणजी की सन्निधि, युवाचार्य महावीर कुमार जी के मार्गदर्शन,निर्देशन में हम सभी निश्चिंत होकर आत्मसाधना करते हुए स्वयं को गौरवान्वित महसूस करेंगे। आचार्य प्रवर एवं युवाचार्य प्रवर की जुगलजोडी़ में पुरुषार्थ, पापभीरुता, अप्रमत्तता,आत्मनिष्ठा,संयमनिष्ठा, सर्वेंद्रिय संयम, के साथ -साथ प्रेरणा, प्रोत्साहन, वात्सल्य भाव भी देख रहे है। ऐसे ओजस्वी, तेजस्वी, तपस्वी, यशस्वी, मनस्वी शास्ता को पाकर यह तेरापंथ संघ प्रगति के पायदान पर चढ़ता रहे।भैक्षव शासन जिनशासन में अद्वितीय बना रहे।चतुर्विध धर्मसंघ की आध्यात्मिक साधना उज्ज्वल बनती रहें। आपकी व्यवहारशैली, चिंतनशैली, कार्यशैली से मानवजाति का कल्याण हो। मंगलकामना, शुभ भावना, तेरापंथ धर्मसंघ के उजले भविष्य के प्रति।आप स्वस्थ रहें, दीर्घायु हो। अनन्त अनन्त कृतज्ञता महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी के प्रति। अनन्त अनन्त अभिवंदन, अभिनंदन युवाचार्य महावीर कुमार जी के प्रति।