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जैन विद्या से सम्यक्त्व पुष्ट होता है
मुनि आकाश कुमार जी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा राजराजेश्वरी नगर के तत्वावधान में जैन विद्या परीक्षा-2025 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का सम्मान एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। मुनि श्री ने जैन विद्या का महत्व बताते हुए कहा कि जैन धर्म में ज्ञान का बहुत महत्व है आचार्य तुलसी ने इस महत्व को समझते हुए तेरापंथ श्रावक समाज को जैन विद्या प्रकल्प का अवदान दिया। श्रावक संबोध में आचार्य तुलसी ने कहा भी है 'फल उपासना का श्रवण, मिले श्रवण से ज्ञान। फिर विज्ञान विवेचना, उसे प्रत्याख्यान' अर्थात श्रमणों की उपासना करने से जो आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है उससे श्रावक का विवेक जागृत होता है और तब वह प्रत्याख्यान का महत्व समझकर पापकारी प्रवृत्तियों का परित्याग करता है जो मोक्ष के मार्ग का प्रथम सोपान है। मुनिश्री हितेन्द्र कुमार जी ने जैन विद्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्जन का असर आपके आचार-विचार पर पड़ता है। हमारा सम्यक्त्व पुष्ट होता है। सम्यक्त्व के पांचों लक्षण को विश्लेषित करते हुए कहा सिर्फ जैन कुल में जन्म लेने से ही हम जैनी नहीं बन जाते बल्कि हमारी श्रद्धा का केन्द्र बिन्दु देव-गुरु-धर्म होना चाहिए। जैन विद्या राजराजेश्वरी नगर की सह केंद्र व्यवस्थापिका संगीता डागा ने स्थानीय केंद्र के परीक्षार्थियों की जानकारी दी। सभाध्यक्ष कमलसिंह दुगड़ ने अपने विचार प्रस्तुत किए। जैन विद्या प्रभारी सीमा छाजेड़ ने विचार व्यक्त किए ।