सामायिक अनमोल निधि है

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रोहिणी, दिल्ली।

सामायिक अनमोल निधि है

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या 'शासनश्री' साध्वी सुमनश्रीजी के सान्निध्य में 'शनिवार सामायिक का बार' सामूहिक सामायिक अनुष्ठान कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। करीब दो सौ (२००) श्रावक श्राविकाओ की बहुत बड़ी उपस्थिति में दिल्ली में पहली बार एक साथ सात से आठ शनिवार को सामायिक हुई। जिसमें पांच साल तक के बच्चों की भी सहभागिता रही। तेरापंथ प्रबोध के सह संगान के साथ कार्यकम प्रारम्भ हुआ। 'शासनश्री' साध्वी सुमनश्री जी ने सामायिक की महत्ता पर बोलते हुए कहा कि- महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी का यह महनीय उपहार तेरापंथ समाज के लिए वरदान सिद्ध हो गया है। सामायिक अमूल्य निधि है इसका किसी भी कीमत पर मूल्य नहीं चुकाया जा सकता। प्रतिदिन की एक सामायिक जीवन की खरी कमाई है यह समता की आय है जिससे आध्यात्मिक शक्ति का संचय होता रहता है। सामायिक काल में किए गये अनेक प्रयोगों से जीवन में रुपान्तरण घटित हो जाता है। आज के इस भौतिक प्रदान युग में आम आदमी तनाव की चद्दर ओढकर सोता है। भय चिन्ता अवसाद में जिन्दगी के स्वर्णिम क्षण बीत जाते हैं। ऐसे वातावरण और अपसंस्कृति के साये में पल रहे युवा और बच्चों का भविष्य क्या होगा कुछ‌ कहा नहीं जाता। प्रतिदिन सामायिक और जप ध्यान न स्वाध्याय से नई ऊर्जा मिलती है ओर मनोबल आत्मबल पुष्ट बनता है। सामूहिक सामायिक से नह पीढी को प्रेरणा मिलती है। अल्फा तरंगे जागृत होती है और एक रक्षाकवच का घेरा बनता है। साध्वी मधुर लता ने सामायिक गीत सुनाते हुए ऐसा ही अनुष्ठान करने की प्रेरणा दी।