निर्ग्रंथ दर्शन मोक्ष की राह को प्रशस्त करता है

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कटक।

निर्ग्रंथ दर्शन मोक्ष की राह को प्रशस्त करता है

भारतवर्ष में निर्ग्रंथ दर्शन की परंपरा अत्यंत प्राचीन रही है। यह दर्शन जीवन का महान आधार होने के साथ-साथ युगानुकूल चिंतन एवं जीवन-दृष्टि प्रदान करता रहा है। मध्यकाल में निर्ग्रंथ दर्शन का अस्तित्व कुछ क्षीण अवश्य हुआ, किंतु वर्तमान समय में भी यह दर्शन जीवन को सही दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बना हुआ है। निर्ग्रंथ दर्शन के मौलिक सिद्धांतों को वर्तमान युग के संदर्भ में समझने और जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से कटक प्रवासित युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि मोहजीत कुमारजी के सान्निध्य में निर्ग्रंथ दर्शन कार्यशाला - 2026 का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य अभिभाषक मुनि जयेश कुमारजी ने अतीत, वर्तमान एवं भविष्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रभावशाली एवं बेबाक प्रस्तुति देते हुए निर्ग्रंथ दर्शन की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने जैन दर्शन, तेरापंथ दर्शन, मंत्र शक्ति, जीवनशैली एवं इतिहास जैसे विविध विषयों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कार्यशाला के अंतिम दिन आयोजित मंथन समारोह में मुनि जयेश कुमारजी ने कहा कि निर्ग्रंथ दर्शन भौतिकता से आध्यात्मिकता की ओर बढ़ने का अंतर्दर्शन है। यही दर्शन हमारी भावधारा को परिष्कृत कर मोक्ष की राह को प्रशस्त करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि कार्यशाला के दौरान प्राप्त बोधि के माध्यम से वे अपने भीतर की ग्रंथियों को पहचानने और उन्हें परिष्कृत करने का निरंतर प्रयास करें। मुनिश्री ने कार्यशाला में किशोरों एवं कन्याओं की निरंतर एवं उत्साहपूर्ण उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी का इस प्रकार धर्मसंघ से जुड़ना संघ के उज्ज्वल भविष्य का शुभ संकेत है। तेयुप अध्यक्ष शशि चोरड़िया, किशोर मंडल प्रभारी वैभव सेठिया, कन्या मंडल संयोजिका उर्वशी चोपड़ा एवं रिया पारख ने कार्यशाला से जुड़े अनुभव साझा किए। आयोजन एवं व्यवस्थापन में हर्ष चोपड़ा, सौरव दुग्गड़ का योगदान रहा।