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आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की कृपा से प्रारंभ हुआ विकास महोत्सव
तेरापंथ धर्मसंघ उदितोदित धर्मसंघ है। आचार्य भिक्षु ने मर्यादावली में अनेकांत सिद्धांत का उपयोग किया। उन्होंने एकधारा ऐसी बनाई जिससे प्रत्येक आचार्य ने अपनी सूझ-बूझ का उपयोग कर धर्मसंघ को युगानुकूल बनाने का प्रयास किया। वह धारा है—'मैंने वर्तमान समय देखकर मर्यादाओं का निर्माण किया है। उत्तरवर्ती आचार्य इसमें परिवर्तन या संशोधन करें और नई मर्यादा का निर्माण करें।' उसे सब साधु-साध्वी सहर्ष स्वीकार करें। जयाचार्य ने संघ में तीन उत्सव प्रारंभ किये—चरमोत्सव, पट्टोत्सव, मर्यादा महोत्सव। आचार्य श्री तुलसी ने अपने युवाचार्य को आचार्य पद पर प्रतिष्ठित करके धर्मसंघ में स्वर्णिम इतिहास का सृजन किया। जब आचार्य श्री तुलसी का पट्टोत्सव आया और उसे मनाने की जब गुरुदेव ने मनाही की, क्योंकि पट्टोत्सव वर्तमान आचार्य का ही मनाया जाता है, गुरुदेव ने फरमाया, 'मैंने आचार्य पद का विसर्जन कर दिया, पट्टोत्सव आचार्य महाप्रज्ञजी का मनाएँ।' उस समय आचार्य श्री महाप्रज्ञजी ने फरमाया कि हम इसे पट्टोत्सव नहीं, विकास महोत्सव के रूप में मनाएँगे, क्योंकि तेरापंथ का जो अभिनव विकास देख रहे हैं, इसमें गुरुदेव तुलसी का सुश्रम, दीर्घचिंतन और युगानुकूल समस्याओं का समाधान दिखाई दे रहा है। जैन-अजैन जिस श्रद्धा-भक्ति से सेवा, दर्शन, प्रवचन, उपासना आयामों से जुड़ा है, यह सब गुरुदेव के व्यापक चिंतन का ही प्रभाव है। अणुव्रत, ध्यान, जीवन विज्ञान के द्वारा व्यक्तित्व निर्माण का कार्य कर लोगों को व्यसनमुक्त, साधनायुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी—महिला मंडल, युवक परिषद, कन्यामंडल, किशोर मंडल, ज्ञानशाला आदि कार्यक्रम बनाकर समवयस्क लोगों का विकास कर संघ समाज का व्यापक रूप बनाया। जैन संस्कार विधि के द्वारा लोगों को जैनत्व के संस्कारों से सुसज्जित किया। रूढ़ि-उन्मूलन के द्वारा घूंघट प्रथा, बाल विवाह, मृत्युभोज आदि पर विराम लगा। शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक कार्य हुआ, जिससे किशोर और युवा ही नहीं, कन्याओं और महिलाएं भी आज समाज में उच्च शिक्षा प्राप्त होने के कारण वक्तव्य लेखन में ही नहीं, प्रशासन में भी गतिमान बनी है। गुरुदेव ने केवल साधु-साध्वियों और श्रावक-श्राविकाओं का ही उत्थान, विकास नहीं किया, बल्कि अजैनों को भी सुख, शांति और आनंदमय जीवन जीने की कला सिखाई। इसलिए आप मानवता के मसीहा कहलाये। विकास महोत्सव पर यह कामना करते हैं कि गुरुदेव द्वारा प्रदत्त हर आयाम का जनता उपयोग करती रहे।