भक्तामर स्तोत्र सभी स्तोत्रों में सर्वश्रेष्ठ

संस्थाएं

कृष्णानगर, दिल्ली।

भक्तामर स्तोत्र सभी स्तोत्रों में सर्वश्रेष्ठ

डॉ. मुनि अभिजीत कुमार जी व मुनि जागृत कुमार जी के पावन सानिध्य में आयोजित भक्तामर अनुष्ठान अत्यंत ही आध्यात्मिक व दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। तेयुप गांधीनगर दिल्ली के कर्मठ अध्यक्ष प्रकाश सुराणा ने पधारें हुए सभी पदाधिकारियों का व अनुष्ठान में उपस्थित श्रावक श्राविका समाज का अपने व्यक्तव्य से स्वागत व अभिनंदन किया। डॉ. मुनि अभिजीत कुमार जी ने श्रावक श्राविका समाज को भक्तामर का महत्व बताते हुए फरमाया की आचार्यमानतुंग द्वारा रचित यह स्त्रोत सभी स्रोतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। श्वेतांबर और दिगंबर दोनों परंपराओं में इसका बहुत महत्व है इसका एक एक श्लोक मंत्र से ओतःप्रोत व बहुत ही चमत्कारी है। भक्तामर स्त्रोत की रचनाकाल सातवीं शताब्दी के लगभग है श्वेतांबर परंपरा में 44 व दिगंबर परंपरा में 48 श्लोकों की मान्यता है। मुनि जागृत कुमार जी ने अपने उद्बोधन में भक्तामर के गूढ़ रहस्यों का चित्र सहित अर्थ व मार्मिक विवेचन करते हुए सभी श्रावक श्राविका समाज को आत्मजागृति का संदेश दिया। डॉ.मुनि अभिजीत कुमार जी व मुनि जागृत कुमार जी के मुखारबिंद से अनुष्ठान सम्पन्न हुआ।