TPF का 19वां राष्ट्रीय अधिवेशन : लाडनूं

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लाडनूं।

TPF का 19वां राष्ट्रीय अधिवेशन : लाडनूं

'हो हमारा योगक्षेम' थीम पर जुटे देशभर से 625 से अधिक प्रोफेशनल्स

प्रथम दिन –
पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य एवं मंगल आशीर्वाद से तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (टीपीएफ) के त्रिदिवसीय 19वें राष्ट्रीय अधिवेशन ‘हो हमारा योगक्षेम’ का शुभारंभ जैन विश्व भारती, लाडनूं में हुआ। अधिवेशन में देशभर की टीपीएफ शाखाओं से लगभग 625 प्रोफेशनल्स सहभागिता कर रहे हैं। प्रथम दिन आध्यात्मिक मार्गदर्शन, संगठनात्मक उपलब्धियों, वार्षिक साधारण सभा एवं नई राष्ट्रीय टीम के निर्वाचन सहित विभिन्न कार्यक्रम हुए। प्रथम दिन वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘टीपीएफ गौरव’ सम्मान सूर्यप्रकाश श्यामसुखा (गंगाशहर-लुधियाना) को पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में प्रदान किया गया। सम्मान स्वीकार करते हुए श्यामसुखा ने इसे आचार्यश्री के चरणों में समर्पित किया। टीपीएफ राष्ट्रीय अध्यक्ष हिम्मत माण्डोत, चीफ ट्रस्टी एस.के. सिंघी, महामंत्री मनीष कोठारी सहित पदाधिकारियों ने युवाचार्य श्री महावीर कुमारजी के दर्शन-वंदन एवं सेवा का लाभ लिया। टीपीएफ टीम ने आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन-वंदन एवं सेवा का लाभ लिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष हिम्मत माण्डोत ने फोरम की विगत दो वर्षों की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। शिक्षा क्षेत्र में आचार्य महाप्रज्ञ शिक्षा सहयोग योजना के माध्यम से प्रतिवर्ष 4.5 से 5 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति एवं फीस सहायता दी जा रही है तथा 13 नॉलेज सेंटर युवाओं को कोचिंग के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘मिशन दृष्टि’ के तहत करीब 1.40 लाख बच्चों की नेत्र जांच की गई है और अहमदाबाद में चिकित्सा एवं नेत्र सेवा प्रकल्प विकसित किया जा रहा है। दो वर्षों में टीपीएफ का कॉर्पस फंड 13.5 करोड़ से बढ़कर करीब 20 करोड़ तथा एफडी 3 करोड़ से बढ़कर 7.5 करोड़ रुपए हुई है। विभिन्न प्रकल्पों के लिए करीब 24 करोड़ रुपए के डोनर कमिटमेंट एवं लगभग 5 करोड़ रुपए का सीएसआर सहयोग प्राप्त हुआ है। टीपीएफ की 17वीं वार्षिक साधारण सभा राष्ट्रीय अध्यक्ष हिम्मत माण्डोत की अध्यक्षता में महाश्रमण ऑडिटोरियम, विमल विद्या विहार, जैन विश्व भारती में आयोजित हुई। महामंत्री मनीष कोठारी ने वर्षभर की आध्यात्मिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, प्रोफेशनल डेवलपमेंट एवं सेवा गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नरेश कठोतिया ने वार्षिक आय-व्यय का ब्यौरा सदन के समक्ष रखा। सत्र 2026-28 के लिए पुष्प जैन (मोमासर-नई दिल्ली) को टीपीएफ का राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा प्रकाश बैद (लाडनूं-कोलकाता) को चीफ ट्रस्टी निर्वाचित किया गया। नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पुष्प जैन ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व अध्यक्षों एवं टीमों द्वारा तैयार की गई मजबूत नींव को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी। नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्प जैन एवं चीफ ट्रस्टी प्रकाश बैद ने टीपीएफ के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक डॉ. मुनि रजनीश कुमारजी के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
द्वितीय दिवस–
आचार्यश्री महाश्रमणजी ने लक्ष्य निर्धारण का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन में सर्वोच्च लक्ष्य के साथ छोटे-छोटे उपलक्ष्य भी निर्धारित होने चाहिए। धार्मिक जीवन में मोक्ष परम लक्ष्य है, जबकि तपस्या, साधना, स्वाध्याय एवं मौन जैसे लक्ष्य उसकी दिशा में आगे बढ़ने के साधन हैं। उन्होंने कहा कि ‘अप्राप्तस्य प्रापणं योगः, प्राप्तस्य रक्षणं क्षेमः’—जो प्राप्त नहीं है उसे प्राप्त करना योग और जो प्राप्त है उसकी रक्षा करना क्षेम है। आचार्यश्री ने टीपीएफ को तेरापंथ समाज के शिक्षित एवं विशेषज्ञ प्रोफेशनल्स को धर्म से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, सीए सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर सेवा करते हैं और जैन धर्म, तेरापंथ दर्शन एवं प्रेक्षाध्यान का अध्ययन करते हैं, यह सराहनीय है। उन्होंने नई टीम को धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। अधिवेशन के द्वितीय दिवस आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में मैनेजिंग एडिटर, ज़ी न्यूज़ अनिल सिंघवी को ‘आचार्य महाश्रमण प्रोफेशनल ऑफ द ईयर अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया गया। अवार्ड की घोषणा निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज ओस्तवाल ने की। नरेश कठोतिया ने उनका परिचय प्रस्तुत किया तथा निर्मल कोटेचा ने सम्मान-पत्र का वाचन किया। सम्मान के बाद अनिल सिंघवी ने टीपीएफ से अपने विशेष जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रोफेशनल डिग्री प्राप्त करना ‘योग’ है, जबकि तेरापंथ धर्मसंघ में जन्म लेकर मिले संस्कारों, विरासत एवं मूल्यों की रक्षा करना ‘क्षेम’ है। मुनि रजनीश कुमारजी के सान्निध्य में आयोजित प्रथम सत्र में संगठन की कार्यप्रणाली एवं भविष्य की दिशा पर मंथन हुआ। मुनिश्री ने कहा कि किसी भी संगठन की वास्तविक ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं और कार्यकर्ताओं से ही मजबूत पदाधिकारी तैयार होते हैं। उन्होंने ‘टारगेट तय करें’ विषय पर कहा कि संगठन के भविष्य के लक्ष्य कार्यकर्ताओं एवं सदस्य संख्या को ध्यान में रखकर तय होने चाहिए। उन्होंने टीपीएफ के करीब 11,500 सदस्यों का उल्लेख करते हुए बड़े लक्ष्य के साथ सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। विगत दो वर्षों में टीपीएफ की गतिविधियों की सराहना करते हुए उन्होंने पूरी टीम का उत्साहवर्धन किया। नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्प जैन ने आगामी कार्यकाल का विजन प्रस्तुत करते हुए थीम ‘Evolve, Scale and Serve’ घोषित की। संगठन के विस्तार के लिए ‘अबकी बार 15,000 पार’ का लक्ष्य रखा गया। उन्होंने कहा कि सदस्य संख्या बढ़ाने के साथ नए सदस्यों को टीपीएफ की कार्यप्रणाली एवं सेवा गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ना प्राथमिकता होगी। द्वितीय सत्र में टीपीएफ गौरव सम्मानित सूर्यप्रकाश श्यामसुखा ने ‘तेरापंथ मेरा पंथ’ विषय पर विचार रखते हुए कहा कि केवल धार्मिक ज्ञान प्राप्त करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे आचरण में उतारना आवश्यक है। उन्होंने आचार्य भिक्षु के दर्शन एवं सिद्धांतों की चर्चा करते हुए साध्य और साधन की शुद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि त्याग, अहिंसा एवं संयम धर्म के आधार हैं तथा राग-द्वेष से ऊपर उठकर वीतरागता की दिशा में बढ़ना ही आत्मकल्याण का मार्ग है। साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने आध्यात्मिक विकास के साथ प्रोफेशनल्स को धर्म प्रभावना का दिया संदेश। तीसरे सत्र में साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशाजी ने कहा कि जीवन में श्रद्धा अखंड एवं दृढ़ होनी चाहिए। उन्होंने टीपीएफ की सेवा भावना एवं मजबूत नेटवर्किंग की सराहना करते हुए प्रोफेशनल जीवन में भावनात्मक मूल्यों की महत्ता बताई। उन्होंने क्रोध, अहंकार, माया एवं लोभ जैसे नकारात्मक भावों पर नियंत्रण रखते हुए सकारात्मक एवं संतुलित व्यवहार की प्रेरणा दी। साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने कहा कि केवल व्यावसायिक सफलता पर्याप्त नहीं, बल्कि आध्यात्मिक क्षेत्र में भी शिखर तक पहुंचने का प्रयास होना चाहिए। आत्म-दर्शन, अंतर्मुखी चिंतन, अहिंसा, अपरिग्रह एवं अनेकांतवाद जैसे सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने प्रेक्षाध्यान को सजगता, एकाग्रता एवं निर्णय क्षमता बढ़ाने का माध्यम बताया। उन्होंने टीपीएफ के नए नेतृत्व से आगामी दस वर्षों में ऐसे प्रोफेशनल्स तैयार करने का लक्ष्य रखने का सुझाव दिया, जो जैन दर्शन, तेरापंथ एवं प्रेक्षाध्यान के विशेषज्ञ बनकर देश-विदेश में संघ की प्रभावना में योगदान दे सकें।
पांचवें सत्र में अनिल सिंघवी के साथ ‘इंडिया ग्रोथ स्टोरी’ विषय पर संवाद हुआ। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन पारख ने विभिन्न सवाल पूछे, जिनका सिंघवी ने सहज एवं व्यावहारिक तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि डिग्री केवल आधार देती है, लेकिन प्रोफेशनल को जीवनभर अपने ज्ञान को अपडेट करते रहना चाहिए। उन्होंने मेहनत, निरंतर सीखने, धैर्य एवं सही रिसर्च को सफलता का आधार बताया।
तृतीय दिवस–
देशभर से आए टीपीएफ सदस्यों ने ‘गाइडेड टूर–जेवीबी कैंपस’ एवं उत्साहपूर्ण रैली में सहभागिता की। अंतिम दिन नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण, मिशन दृष्टि एंबुलेंस का लोकार्पण, आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं सम्मान समारोह प्रमुख आकर्षण रहे। आचार्यश्री के सान्निध्य में टीपीएफ के ‘मिशन दृष्टि’ प्रकल्प के तहत नई एंबुलेंस का लोकार्पण हुआ। निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हिम्मत माण्डोत ने बताया कि मिशन दृष्टि के माध्यम से पिछले वर्ष करीब 1.30 लाख और इस वर्ष करीब 1.40 लाख बच्चों की नेत्र जांच की गई। नेत्र जांच मशीन बनाने वाली कंपनी अप्पासामी एसोसिएट्स द्वारा टीपीएफ को दो वाहन भेंट किए गए हैं। नई एंबुलेंस में स्लिट लैंप सहित आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं, जिससे गांवों, स्कूलों एवं संकरी गलियों तक पहुंचकर नेत्र जांच शिविर लगाए जा सकेंगे। आचार्यश्री ने सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि प्रोफेशनल्स अपनी विशेषज्ञता, संपर्क एवं बुद्धि का उपयोग धर्मसंघ एवं सेवा कार्यों में कर रहे हैं। युवाचार्य श्री महावीर कुमारजी ने टीपीएफ के लिए T-P-F का भावपूर्ण अर्थ बताते हुए कहा कि T–Transcendence के माध्यम से अपनी कमजोरियों एवं कषायों से ऊपर उठकर विनम्रता, संयम एवं सहिष्णुता अपनाएं। P–Progress के माध्यम से सही दिशा में व्यावसायिक विकास के साथ आध्यात्मिक उन्नति करें और F–Fellowship के माध्यम से पारस्परिक सहयोग, सद्भाव एवं संगठन की शक्ति को मजबूत बनाएं। अधिवेशन के दौरान टीपीएफ के वर्ष 2026-28 के लिए नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्प जैन के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हिम्मत माण्डोत ने नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष, चीफ ट्रस्टी एवं उनकी टीम तथा आर्बिट्रेटर को पद एवं दायित्व की शपथ दिलाई। नई टीम में राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्प जैन, निवर्तमान अध्यक्ष हिम्मत माण्डोत, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष कोठारी, नरेश कठौतिया, सुनील बोहरा, विजय कुमार नाहटा, मनोज नाहटा एवं दिनेश धोका शामिल हैं। राष्ट्रीय महामंत्री नवीन चोरड़िया, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र चोरड़िया तथा राष्ट्रीय सहमंत्री मोहित बैद, राजेश कुमार जैन, अभिषेक जैन एवं विक्रम कोठारी को दायित्व सौंपा गया। सह कोषाध्यक्ष के रूप में दीपक कुचेरिया एवं विकास हिरण को जिम्मेदारी दी गई। छठे सत्र में मुनि श्री कुमारश्रमणजी ने ‘करो योगक्षेम स्वयं का’ विषय पर कहा कि टीपीएफ के 19 वर्ष पूर्ण होना संस्था की परिपक्वता का संकेत है।
प्रत्येक सदस्य को आत्ममंथन करना चाहिए कि ‘हमारा संघ, हमारा दायित्व’ की भावना से वह धर्मसंघ के लिए क्या योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि टीपीएफ केवल प्रोफेशनल नेटवर्किंग का मंच नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता एवं तेरापंथ के मूल्यों को जीवन में उतारने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि योगक्षेम का अर्थ केवल नई उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि मूल्यों, स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं पारिवारिक संबंधों का संरक्षण भी है। सेवा के लिए केवल आर्थिक सहयोग आवश्यक नहीं, बल्कि व्यक्ति अपनी विशेषज्ञता एवं क्षमता के अनुसार भी योगदान दे सकता है।
उन्होंने सदस्यों को प्रतिदिन आत्ममंथन करने की प्रेरणा दी कि ‘आज मैंने तेरापंथ धर्मसंघ के लिए क्या किया?’ मुनिश्री ने मोबाइल एवं एआई के संतुलित उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि तकनीक सुविधा के लिए है, उसे जीवन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। भोजन, ड्राइविंग एवं पारिवारिक समय में मोबाइल से दूरी तथा रात में निश्चित समय के बाद डिजिटल कट-ऑफ रखने की प्रेरणा दी।
समापन अवसर पर वर्ष 2025-26 में विभिन्न शाखाओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किए गए।