संपादकीय
जड़ों से जुड़कर गढ़ेंगे नया इतिहास
प्रिय युवा साथियों....
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के इस गौरवशाली सफर में 60वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन 'संवर्धनम्' केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी युवा ऊर्जा, समर्पण और निष्ठा का एक ऐतिहासिक महाकुंभ है।
परम पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री महाश्रमण जी की पावन सन्निधि और अध्यात्म व शांति की तपोभूमि लाडनूं में होने जा रहा यह अधिवेशन हम सभी को हमारी जड़ों से पुनः जोड़ने का एक अनुपम अवसर प्रदान कर रहा है। लाडनूं की यह पावन धरा, जहाँ मन को शांति और जीवन को सही दिशा मिलती है, 26-27-28 सितंबर को पूरे देश से जुटने वाली ऊर्जावान युवा शक्ति की साक्षी बनने जा रही है।
'संवर्धनम्' का सन्देश: संगठन का योगक्षेम–
'संवर्धनम्' का अर्थ है— निरंतर वृद्धि, पोषण और नए विचारों का विकास। अभातेयुप के मूल त्रिसूत्र—सेवा, संस्कार और संगठन—को नए आयाम देना ही इस अधिवेशन का ध्येय है। इस 'योगक्षेम वर्ष' में हमारा लक्ष्य केवल कार्य करना नहीं, बल्कि संघ, समाज और राष्ट्र के लिए अपनी निष्ठाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है।
युवा शक्ति से आह्वान–
आज समाज और देश को एक ऐसी अनुशासित और समर्पित युवा पीढ़ी की आवश्यकता है जो अध्यात्म की नीव पर प्रगति की इमारत खड़ी कर सके। जब देश के कोने-कोने से हज़ारों युवा एक ध्येय और एक दिशा के साथ लाडनूं की धरा पर एकत्र होंगे, तब उस दिव्य ऊर्जा से समाज और धर्मसंघ में एक अभूतपूर्व क्रांति का सूत्रपात होगा।
आइए! हम सब मिलकर इस 60वें राष्ट्रीय अधिवेशन को एक यादगार अध्याय बनाएँ। अपनी जड़ों से जुड़ें, पूज्य गुरुदेव के चरण रज से ऊर्जा संचित करें और 'संवर्धनम्' के संकल्पों को आत्मसात कर नए उत्साह के साथ आगे बढ़ें।
पवन मांडोत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद