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ज्ञानशाला के बच्चे धर्मसंघ के भावी कर्णधार हैं
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य मुनि आनंद कुमार जी ‘कालू’ एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार जी ठाणा - 2 के पावन सान्निध्य में ज्ञानशाला दिवस का आयोजन उत्साह एवं आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। मुख्य प्रशिक्षिका ललिता मालू द्वारा स्वागत वक्तव्य तथा सभा अध्यक्ष रितेश खटेड़ द्वारा अध्यक्षीय वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। ।इस अवसर पर मुनि विकास कुमार जी ने ज्ञानशाला पर अपने भाव व्यक्त किए । कार्यक्रम में ‘गुरु दर्शन यात्रा—लाडनूं के सुनहरे पल’ विषयक वीडियो क्लिप के माध्यम से ज्ञानशाला परिवार की भावनाओं को प्रस्तुत किया गया। आभार ज्ञापन पिंकी पटावरी ने किया। मुनि आनंद कुमार जी ‘कालू’ ने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि 'ज्ञानशाला केवल पढ़ने-पढ़ाने का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों के जागरण की शाला है। यहां बच्चों को ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला, अनुशासन, विनय, सदाचार और आध्यात्मिक चेतना के संस्कार दिए जाते हैं।' उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था में मिले संस्कार जीवनभर साथ चलते हैं। इसलिए ज्ञानशाला के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का जो कार्य हो रहा है, वह समाज और धर्मसंघ के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। मुनिश्री ने कहा कि ज्ञानशाला के बच्चे आज के विद्यार्थी ही नहीं, कल के संस्कारी नागरिक एवं धर्मसंघ के भावी कर्णधार हैं। अभिभावकों और प्रशिक्षिकाओं का दायित्व है कि वे बच्चों में केवल धार्मिक जानकारी ही नहीं, बल्कि आचार्य परंपरा के प्रति श्रद्धा, गुरु के प्रति विनय और जीवन में अहिंसा, संयम एवं सद्भावना को उतारने की प्रेरणा दें। उन्होंने ज्ञानशाला के इस रचनात्मक एवं संस्कारपरक उपक्रम से अधिकाधिक बच्चों को जोड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम की संयोजिका संगीता बैद एवं स्वाति सुराणा रहीं।