संस्कार संवर्धन की शाला : ज्ञानशाला

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चेन्नई।

संस्कार संवर्धन की शाला : ज्ञानशाला

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई के तत्वावधान में ट्रिप्लीकेन एवं किलपॉक दोनों क्षेत्रों में ज्ञानशाला दिवस का आयोजन किया गया। तेरापंथ भवन, ट्रिप्लीकेन में मुनि डॉ. पुलकित कुमार जी ठाणा-2 के पावन सान्निध्य में ज्ञानशाला दिवस का आयोजन हुआ। मंगल उद्बोधन में मुनिश्री ने प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा–बच्चों में सद्गुणों के विकास एवं सद्गति के लिए धार्मिक ज्ञान और संस्कारों की अत्यंत आवश्यकता है। सच्चे एवं अच्छे संस्कार हमें न केवल एक-दूसरे से जोड़ते हैं, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं। धार्मिक ज्ञान एवं संस्कार जीवन में दुर्गुणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः अभिभावक अपने बच्चों को ज्ञानशाला से जोड़ने एवं नियमित रूप से ज्ञानशाला भेजने का प्रयास करें। मुनिश्री ने उपस्थित ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं द्वारा ज्ञानशाला में सेवाएँ देने के कार्य की अनुमोदना भी की। चेन्नई सभा अध्यक्ष महेंद्र मांडोत ओर राजेश सांड ने सभी प्रशिक्षिकाओं एवं ज्ञानार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दोनों ही क्षेत्रों में कार्यक्रम सफल, मंगलमय एवं शानदार रूप से संपन्न हों तथा सभी के अथक प्रयास सार्थक हों—यही मंगलकामना है। ट्रिप्लीकेन ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष धारीवाल ने ज्ञानार्थियों एवं प्रशिक्षिकाओं को बधाई दी। ज्ञानशाला आंचलिक सह-संयोजिका चेतना बोहरा ने ज्ञानशाला प्रकोष्ठ की ओर से प्रशिक्षिकाओं को आवश्यक एवं महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार जी ने ज्ञानशाला प्रेरणा गीत प्रस्तुत किया। तांबरम ज्ञानशाला ने जैन संस्कार विधि से जन्मदिन कैसे मनाएँ, रायपुरम् ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने दान का महत्व, ट्रिप्लीकेन ज्ञानशाला के बच्चों ने आचार्य भिक्षु के दृष्टांत, पट्टालम ज्ञानशाला ने स्पाइडर-मैन एवं बैटमैन के माध्यम से अहिंसा का संदेश, साहूकारपेट ज्ञानशाला ने ज्ञानशाला जाने का प्रभाव, पुरानी धोबीपेट ज्ञानशाला ने पाँच महाव्रतों का विश्लेषण, वड़पलनी ज्ञानशाला के बच्चों ने जीवन में संस्कारों का महत्व, तथा ईएमआर ज्ञानशाला ने पर्युषण महापर्व की आराधना विषय पर प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुत कर उपस्थित सभी का मन मोह लिया। संचालन ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाएं मधु चोरड़िया एवं कुसुमलता चोरड़िया ने किया। चेन्नई क्षेत्र की 25 ज्ञानशालाओं में से 13 ज्ञानशालाओं के लगभग 150 ज्ञानार्थियों एवं 60 प्रशिक्षिकाओं की उत्साहपूर्वक सहभागिता रही।