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प्रशिक्षिकाओं का निष्काम सेवा भाव निर्जरा का महान कार्य
कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी सिद्ध प्रभा जी द्वारा नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से हुआ। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष रणजीत सिंह बरडिया ने सभी आदरणीय अतिथियों का भावभीना स्वागत एवं अभिनंदन किया। समारोह को संबोधित करते हुए साध्वी सिद्धप्रभा जी ने कहा कि ज्ञानशालाएँ पूज्य गुरुदेव की असीम अनुकंपा से निरन्तर विस्तार पा रही हैं। उन्होंने प्रशिक्षिकाओं के निष्काम सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि बिना किसी स्वार्थ के बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना निर्जरा का महान कार्य है। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित ज्ञानशाला भेजने का आह्वान किया। अपने प्रेरणादायी संदेश में साध्वी दीक्षाप्रभा जी ने कहा कि आज के डिजिटल युग में जहाँ बच्चे मोबाइल और अन्य भटकावों से घिरे हैं, वहीं ज्ञानशाला ही उन्हें अपनी जड़ों, नैतिक मूल्यों और सात्विक वातावरण से जोड़कर रखने का सबसे सशक्त माध्यम है।
यहाँ ज्ञान के साथ-साथ बच्चों की कलात्मक और बहुमुखी प्रतिभा को निखारा जाता है। मीडिया प्रभारी चेतन बरडिया ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ज्ञानार्थियों द्वारा प्रस्तुत कंठस्थीकरण एवं ज्ञान आराधना कार्यक्रम रही, जिसमें बच्चों ने अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति और आध्यात्मिक लग्न से सभी को अचंभित कर दिया। साध्वी आस्थाप्रभा जी एवं साध्वी दीक्षाप्रभा जी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन ज्ञानार्थी सृष्टि खटेड़ एवं उत्कर्ष कोठारी द्वारा किया गया।