अध्यात्म की यात्रा इन्द्रिय विजय से प्राप्त होती है

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उत्तर हावड़ा।

अध्यात्म की यात्रा इन्द्रिय विजय से प्राप्त होती है

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में सामूहिक आयंबिल कार्यक्रम का आयोजन योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में तेरापंथ महिला मंडल उत्तर हावड़ा द्वारा आयोजित किया गया। जिसमें वृहत्तर कोलकाता की तेरापंथ महिला मंडल, दक्षिण कोलकाता, दक्षिण हावड़ा, पूर्वांचल, टॉलीगंज, बेहाला, साल्टलेक, मध्य कोलकाता, लिलुआ, बाली-बेलूर, उत्तरपाड़ा, हिन्दमोटर, रिषड़ा की विशेष सहभागिता रही। सामूहिक आयंबिल में सभी क्षेत्रों के कुल 230 भाई-बहनों ने आयंबिल तप कर अपनी सहभागिता दर्ज की। इस अवसर पर उद्बोधन प्रदान करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा — अध्यात्म जगत की यात्रा इन्द्रिय विजय से प्राप्त होती है। इन्द्रिय विजय की साधना रसनेन्द्रिय के संयम से होती है। रसनेन्द्रिय संयम का महत्त्वपूर्ण माध्यम है तप साधना। तपों में एक विशिष्ट तप है आयंबिल। आयंबिल स्वाद विजय की साधना व ऊनोदरी तप है। इसमें एक धान का भोजन ग्रहण किया जाता है। एकासन की तरह शेष विधि है। इसमें सभी रसों का त्याग किया जाता है इसलिए इसे रस परित्याग तप में भी शामिल किया जा सकता है। आयंबिल से अनेक रोगों का शमन हो सकता है। आयंबिल तप के कारण द्वारिका नगरी द्वीपायन ऋषि के कोप से 12 वर्ष तक बची रही। सभी आयंबिल तपस्वियों के प्रति मंगलकामना। इस अवसर पर मुनि परमानंद ने जप अनुष्ठान कराते हुए अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की कार्यसमिति सदस्या रमण पटवारी, पुखराज सेठिया, तेरापंथ महिला मंडल उत्तर हावड़ा की अध्यक्षा सुजाता दुगड़ व सरिता राखेचा ने सभी तपस्वियों के प्रति अपनी मंगलभावनाएं संप्रेषित की व आभार व्यक्त किया।