आत्मा का स्नान है तपस्या

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ट्रिप्लीकेन, चेन्नई।

आत्मा का स्नान है तपस्या

तेरापंथ भवन, ट्रिप्लीकेन में आचार्यश्री महाश्रमण के सुशिष्य मुनि डॉ पुलकितकुमार ठाणा- 2 के सान्निध्य में अणुव्रत समिति अध्यक्षा सुभद्रा लुणावत के कंठी तप का अभिनन्दन समारोह समायोजित हुआ। डॉ मुनि पुलकितकुमारजी ने कहा कि जैन आगमों में आभ्यंतर और बाह्य तपस्या का विशेष उल्लेख है। तप करने से आत्मा सरल और निष्पाप बनती है, तपस्या आत्मा का स्नान है। जिस प्रकार तेज हवा से सघन बादल छिन्न-भिन्न हो जाते है, उसी प्रकार तपस्या के द्वारा पापमय बादल विलीन हो जाते हैं। मुनिश्री ने आगे कहा कि तप मोक्ष मार्ग का सबल साधन हैं। तपस्या कर्म निर्जरा का प्रबल हेतु है, इससे मनोबल बढ़ता है और आध्यात्मिक उन्नति होती हैं। मुनिश्री ने कहा सुभद्राजी तपस्या करते हुए भी अणुव्रत समिति के कार्यक्रमों में सक्रियता से सहभागी रहती थी। चातुर्मासिक तपोत्सव के अंतर्गत उन्होंने 43 दिवसीय कंठी तप जैसी विशिष्ट तपस्या की भेंट दी है, आपके आध्यात्मिक मंगलमय जीवन की शुभकामना। नचिकेता मुनि आदित्यकुमार ने तपस्या की अनुमोदना में गीत प्रस्तुत किया। ट्रिप्लीकेन ट्रस्ट बोर्ड की ओर से गौतमचंद सेठिया ने अभिनन्दन स्वर प्रस्तुत करते हुए प्रबंध न्यासी संतोष धारीवाल के साथ तपस्वी का अभिनन्दन किया। संचालन अणुव्रत समिति उपाध्यक्ष स्वरूपचन्द दाँती ने किया। ट्रिप्लीकेन तेरापंथ महिला मण्डल, अणुव्रत समिति, तेरापंथ प्रोफेशनल फॉर्म राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश धोका, तेरापंथ सभा चेन्नई द्वारा साहित्य, मोमेंटो से सम्मान किया गया।