आयंबिल तप के प्रभाव से सुरक्षित रही द्वारिका

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चेम्बूर।

आयंबिल तप के प्रभाव से सुरक्षित रही द्वारिका

आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी निर्वाण श्रीजी ठाणा-6 के सानिध्य में तेरापंथ महिला मंडल, चेम्बूर द्वारा सामूहिक आयम्बिल अनुष्ठान का आयोजन किया गया। साध्वी निर्वाण श्रीजी ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को आयम्बिल तप की प्रेरणा देते हुए कहा कि आयम्बिल अनासक्ति का प्रयोग है। उन्होंने कहा कि जहाँ अनेक भाई-बहन लंबी-लंबी तपस्याएँ करते हैं, वहीं एक दिन अस्वाद का स्वाद लेना भी आवश्यक है। साध्वी योगक्षेम प्रभाजी ने श्रीकृष्ण एवं द्वारिका की घटना का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार आयम्बिल तप के प्रभाव से द्वारिका नगरी सुरक्षित रही। साध्वी निर्वाण श्रीजी ने इस अवसर पर उपस्थित सभी को प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी करवाया। साध्वीश्रीजी का प्रेरणापाथेय प्राप्त कर सभी भाई-बहनों ने उत्साह एवं श्रद्धा के साथ आयम्बिल अनुष्ठान में सहभागिता निभाई। इस अवसर पर बहनों के साथ-साथ तेरापंथ सभा चेम्बूर के अध्यक्ष लक्ष्मण कोठारी, मंत्री दिलीप मेहता सहित अन्य भाइयों ने भी आयम्बिल तप कर आध्यात्मिक निर्जरा की।