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आयंबिल सिखाता है सुख स्वाद में नहीं संयम में है
परमपूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि आनंद कुमार जी 'कालू' एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महिला मंडल द्वारा तेरापंथ धर्मस्थल में सामूहिक आयंबिल तप अनुष्ठान का आयोजन संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम महिला मंडल की अध्यक्ष सुशीला मालू की अध्यक्षता एवं मंत्री सुचित्रा छाजेड़ की देखरेख में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री ने उपस्थित श्रावक समाज को संबोधित करते हुए कहा कि आयंबिल हमें सिखाता है कि जीवन में सुख केवल स्वाद और सुविधाओं में नहीं, बल्कि संयम, त्याग और आत्मानुशासन में है। इसलिए आयंबिल तप केवल भोजन की पद्धति नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, कर्मनिर्जरा और आत्मबल को जागृत करने की साधना है। जैन धर्म में तपस्या का अत्यंत महत्व है और आयंबिल तप को तपस्या की एक विशिष्ट एवं प्रभावशाली तप माना गया है। लगभग 91 बहनों ने इस तप में भाग लेकर अपनी कर्म निर्जरा की साधना की। कार्यक्रम में अभातेममं की कार्यकारिणी सदस्य सुनीता गुजरानी एवं विशेष आमंत्रित सदस्य शिखा बोथरा की गरिमामय उपस्थिति रही।