पर्युषण महापर्व आराधना

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पर्युषण महापर्व आराधना

प्रवक्ता उपासक विनोद बोरड़िया ने कहा कि धर्म से आत्मा की शुद्धि होती है। व्यक्ति को बुढ़ापा आने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि बचपन और जवानी से ही धर्म एवं संयम के संस्कार जीवन में उतारने चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म के लिए अलग से समय निकालना आवश्यक नहीं है। जहां भी समय मिले, वहां पांच-दस मिनट जप, ध्यान और स्वाध्याय किया जा सकता है। उपासक रतनलाल मेहता ने कहा कि पर्युषण महापर्व में ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप की साधना-आराधना करनी चाहिए। धर्म ही जीवन में साथ चलने वाला है, धन साथ नहीं जाएगा। उन्होंने भोजन के प्रति विवेक रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि भोजन शरीर की आवश्यकता है, इसलिए ठूंस-ठूंसकर तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए। विवेकपूर्ण एवं सीमित भोजन स्वास्थ्यवर्धक होता है। छोटे-छोटे त्याग भी जीवन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। उन्होंने भगवान महावीर की वाणी एवं उनके उपदेशों का भी वर्णन किया।