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नमोस्थुणं विद्या कल्प अनुष्ठान का आयोजन
सैंथिया, पश्चिम बंगाल| मुनि डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी के पावन सान्निध्य में आज पहली बार नमोस्थुणं विद्या कल्प का अद्भुत अद्वितीय अनुष्ठान सैंथिया स्थित ऋषभ भवन में आयोजित हुआ। मुनि ज्ञानेन्द्र कुमार जी एवं मुनि रमेश कुमार जी ने शक्र स्तुति यानी नमोस्थुणं का महत्व और विधि बताई। अरिहन्त भगवान और सिद्ध भगवान की श्रद्धामय स्तुति की यह प्राचीन विधि है। नमस्कार महामंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। श्री वज्रपंजर स्तोत्र से रक्षा कवच का निर्माण किया। सामूहिक आध्यात्मिक संकल्पबद्ध होकर उच्चस्वर में एक साथ सस्वर में अनुष्ठान लगभग 2 घंटे 30 मिनट तक चला। अनुष्ठान में भाग लेने के लिए आस पास के क्षेत्रों से भी लोग अच्छी संख्या में आये। मलारपुर, डाकबंगला, बेलडांगा, दखलमाटी (रामपुरहाट), बोलपुर, श्री डूंगरगढ़ (राजस्थान), कलकत्ता, आदि विभिन्न क्षेत्रों से आए थे। तेरापंथी सभा एवं तेरापंथ युवक परिषद के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं का सराहनीय परिश्रम भी रहा।