रचनाएं
धरती अम्बर दशो दिशाएं हर्षित प्रभुदित खुशी मनाएं
धरती अम्बर दशो दिशाएं,
हर्षित प्रभुदित खुशी मनाएं।
युवराजा के अभिनंदन में
श्रद्धा शक्ति थाल सजाएं।।
रहो निरामय चढ़ो हिमालय,
जिनशासन महिमा महकाओ।
भैक्षव शासन नंदनवन में,
महाश्रमण सुखसाया पाओ।।
अनुपमेय व्यक्तित्व तुम्हारा,
शब्दों में कैसे बतलाये।
तुलसी महाप्रज्ञ सी जोड़ी
युग-युग तक अनुशासन पाएं।।
दिव्यलोक से शासन माता,
देख रही है भव्य नजारा।
तेरापंथ का युवराजा,
चमकेगा बनकर ध्रवतारा।।
योगक्षेम वर्ष मन भावन,
गण में बरसे रिमझिम सावन।
महाश्रमण के चरण-शरण में
मन बन जाता मंदिर पावन।।