अनुपम गण सौरभ से शासन गुलशन महकाएं

रचनाएं

साध्वी कीर्तिप्रभा

अनुपम गण सौरभ से शासन गुलशन महकाएं

भावों के फूलों से हम अर्चना सजाएं
अभिनंदन की बेला पुलकित दशो दिशाएं
पापभीरूता सहनशीलता, जागरूकता न्यारी
समता क्षमता विनयशीलता से महकी फुलवारी
अनुपम गण सौरभ से शासन गुलशन महकाएं
दर्शन आगम न्याय, लाकरण वर वैदृष्य तुम्हारा
संस्कृत प्राकृत अंग्रेजी में भी, है कमांड तुम्हारा
शास्दा सिंधु में अवगाहन कर रहन अपार पाएं
गुरू महाश्रमण का शासन, सौभाग्य हम सराएं
योगक्षेम वर्ष में युवराजा को पा, हृदय कमल विकसाएं
जम मधवा की यह जोड़ी सबके दिल को भाएं
गुरू महाश्रमण के शासन में नव दृश्य देख पाएं।