म्हारा भाग्य सरावां हां

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साध्वी हिमश्री

म्हारा भाग्य सरावां हां

म्है तो महाश्रमण गुरु राज री, गुण गरिमा गावां हां।
पाया महावीर युवराज, म्हारा भाग्य सरावां हां।।
गुरू महाश्रमण रो चिंतन गण में, देखो जोश जगावै है।
हो माना गुरूवर रो आभार,
शुभ भावा रो तिलक लगावां हां।।
विनय समर्पण समता स्यूं, महके जीवन फुलवारी ओ।
सद्गुण रत्ना रा भण्डार, महिमा महकावां हां।।
हो युगल पूज्य चरणां री सेवा, कर आशीर्वर पायो ओ।
ओ बिंदु लियो सिंधु आकार, मंगल गीत गावां हां।।
महाश्रमण महावीर जोड़ी, जुग-जुग दीपै गण म्है हो।
हो पावा मंगलमय पथ दर्शन, थानै आज बधावां हां।।
तर्ज – हो मनवा...