रचनाएं
वर्धापन की शुभ बेला में देते आज बधाई
मंगलमय घड़िया आई ।
खुशियां मन में है छाई।।
अभिनंदन की शुभ बेला में।
गूंज रही है शहनाई।।
वर्धापन की शुभ बेला में, देते आज बधाई।।
भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी पर।
प्रभु ने नव उपहार दिया।।
युवराजा पर हुआ प्रतिष्ठित ।
धर्मसंघ को निहाल किया।।
वर्धापन की शुभ बेला में, देते आज बधाई।।
विनय विवेक विद्या इकतारी।
पंचाचार की खिल रही क्यारी।।
स्थित योगी स्थितप्रज्ञ श्रुतधारी।
छोटी वय में प्रभुताधारी।।
वर्धापन की शुभेबेला में, देते आज बधाई।।
दीक्षित महाप्रज्ञ गुरुवर से।
हुये प्रशिक्षित महाश्रमण से।।
प्रभु महाश्रमण की कलाकृति
जन-जन के मन को भाई।।
वर्धापन की शुभ बेला में, देेते आज बधाई।।