रचनाएं
गुरु की महिमा देखी नवेली
भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी अलबेली।
गुरु की महिमा देखी नवेली।।
अनूठो दृश्य प्रभुवर ने दिखलायो।
‘युवराज पद’ खुशियों की बांटे गुड़ की भेली।।
वर्धापन की शुभबेला है, मनहारी।
मंगल-भावों की सभी फूलवारी।।
श्वेत कोयलिया पंचम स्वर में, गीत सुनाये।
नयी उमंगे बनी आज परदाई।।
गुरु उर्जा की बजी शहनाई।
संयम-अनुशासन बना फलदाई।।
मनोनयन मनभावना अनुपम।
तंदरूस्त रहे तनुरत्न सुखदाई।।