रचनाएं
भिक्षु की उर्जा मणियों की माला है
ये गण रखवाला है, इमरत प्याला है
भिक्षु की उर्जा, मणियों की माला है
हो गूंजे जयकार गुरुवर तुम्हारा
स्वीकारो वंदन, तारणहारा,
करे वर्धापन, युवराज तुम्हारा
स्वीकारों वंदन, आज हमारा।।
कुशल जौहरी रो कमाल है, ‘युवराज पद’ बेमिसाल है
नयो-नजारो देख-देख म्हे हुआ निहाल
कोचर कुल रो लाल है, मात-तात खुशहाल है।
गुरु उर्जा को नमन, करां हां बारंबार
जय मधवा ज्यूं जोड़ी, देख मन हरषाये
चंदेरी गुरुगाथा, अंबर-धरती गुंजाये हो हो गूंजे...।
सुंदर-सुंदर व्यवहार है, संगीत कला सुखकार है
सहज-सरलता, लाई सतरंगी बहार
पुण्यवानी, अपरंपार है,
विनम्रता स्यूं, जुड़ग्या तार है।
हर मन में बाजे, खुशियां री सितार
फलसूंड सौभागी, बण्यो महावीर वैरागी
आई आज दिवाली, महाश्रमण गणमाली।।
हो गूंजे
लय – ये कर्म खुद आया है।