आत्मनिरीक्षण कर मैत्री की धारा बहाने का सर्वोत्तम पर्व : भगवती संवत्सरी महापर्व एवं क्षमापना

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साध्वी राकेश कुमारी (बायतु)

आत्मनिरीक्षण कर मैत्री की धारा बहाने का सर्वोत्तम पर्व : भगवती संवत्सरी महापर्व एवं क्षमापना

भगवती संवत्सरी महापर्व समस्त मानव जाति का महान पर्व एवं संस्कृति का आदि दिन है। जैन धर्मावलंबियों ने भगवती संवत्सरी महापर्व को सर्वोपरि महत्व दिया है।
आध्यात्मिक संदेश : यह आध्यात्मिक पर्व समस्त प्राणी जगत के प्रति मैत्री, अहिंसा और करुणा का संदेश लेकर मानव द्वार पर दस्तक देता है।
जन-जागरण व आत्मनिरीक्षण : यह पर्व निर्मल-पवित्र आध्यात्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ जन-जागरण व आत्मनिरीक्षण की दिशा में मैत्री की धारा बहाने का सर्वोत्तम अलौकिक पर्व है।
१. चौरासी लाख जीवों से क्षमायाचना का अवसर: आठ दिनों की विशेष आराधना के साथ-साथ सायं प्रतिक्रमण करके सरलता से, विशुद्ध अंतःकरण से चौरासी लाख जीवों से भी क्षमायाचना कर जीवन निर्मल-पवित्र बनाने का यह पावन वक्त है।
मन का आल्हाद : क्षमायाचना से मन आल्हादित होता है। क्षमा जीवन का आभूषण है।
वीरों का आभूषण : 'क्षमा वीरस्य भूषणम्' — क्षमा महान वीरों का आभूषण होता है।
२. टूटे मन को जोड़ने का सफलतम प्रावधान — खमत खामणा : मन बड़ा नाजुक होता है। कभी-कभी कटु वचन मन से टकराते हैं तो मन खड़ा-खड़ा बिखर जाता है।
अद्वितीय समाधान : उस बिखरे मन को अखंड बना सके, ऐसा सॉल्यूशन किसी भी साइंटिस्ट ने नहीं ढूँढा है और न ही किसी फैक्ट्री ने निर्माण किया है।
भगवान महावीर की देन : अहिंसा के महान पुजारी भगवान महावीर ने उस टूटे मन को जोड़ने और अखंडित रखने का सफलतम प्रावधान दिया है—खमत खामणा।
३. मन की भीतरी गांठों को खोलने का प्रयोग : शरीर और मन की गांठें खतरनाक होती हैं। शरीर के किसी भी कोने में गांठ होती है तो कभी-कभी वह भयंकर खतरे का रूप ले सकती है, लेकिन डॉक्टर शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) द्वारा गांठ को बाहर निकाल देता है।
भावों की शुद्धि : ठीक ऐसे ही मन की भीतरी गांठों को मिटाने का सुंदरतम प्रयोग है—भावों की शुद्धि के साथ मन की गांठें खोल, निश्चल बन, खमत खामणा करना, जिससे जीवन हल्का हो जाता है।
४. अतीत का सिंहावलोकन और भविष्य की प्रेरणा : क्षमायाचना का दिन प्रतिवर्ष आता है और व्यक्ति अपने आप को हल्का करना चाहता है।
प्रायश्चित का पावन दिन : यह पर्व अतीत का सिंहावलोकन कर गतकाल में हुई भूलों का प्रायश्चित करने तथा भविष्य में गलती न दोहराने की प्रेरणा देता है।
पापों का प्रक्षालन : जीवन को निश्चल बना, व्यवहार के धरातल पर स्वयं का इंट्रोडक्शन (आत्म-परीक्षण) कर, पापों को धो डालने का यह पावन दिन है।
५. आगमिक कथा : सम्राट उदायन और चंद्रप्रद्योत की क्षमापना : खमत खामणा औपचारिकता से न करें, बल्कि निश्चल बन शुद्ध अंतःकरण से किया जाए। इसे एक आगमिक कथा से स्पष्ट किया जा सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ : सिंधु सौवीर देश का सम्राट उदायन था और भीतभय नगरी उसकी राजधानी थी। उसकी महारानी प्रभावती परम श्रमणोपासिका श्राविका थी, जबकि राजा तापस धर्म का अनुयायी था। प्रभावती मृत्यु प्राप्त कर देवी बनी और राजा को प्रतिबोध देकर जैन धर्म का श्रावक बनाया।
युद्ध और बंदी : उज्जयिनी नगरी के राजा चंद्रप्रद्योत और उदायन राजा के बीच युद्ध में चंद्रप्रद्योत परास्त हुआ, जिसे उदायन ने जेल में डाल दिया।
संवत्सरी का पोषध : राजा उदायन ने पर्युषण की आराधना के पश्चात संवत्सरी को पोषधोपवास कर सायं प्रतिक्रमण किया और चौरासी लाख जीवों से क्षमायाचना की।
सच्ची क्षमायाचना : प्रातः जब उदायन जेल में चंद्रप्रद्योत से क्षमायाचना करने गया, तो चंद्रप्रद्योत ने कहा— 'यह कैसी खमत-खामणा? मैं तो सांकलों में बंधा हूँ और ऊपर से क्षमापना? मुझसे गले मिलोगे तभी क्षमायाचना होगी। जब मुझे ससम्मान मुक्त करके अपने समान आसन दोगे, तभी क्षमायाचना होगी।'
बंधनमुक्ति : राजा उदायन ने कुछ देर आत्मचिंतन किया और सर्वप्रथम अपराधी चंद्रप्रद्योत राजा को सभी बंधनों से मुक्त कर सच्चे मन से क्षमायाचना की।
६. महामंत्र को आत्मसात करें
क्षमायाचना केवल औपचारिकता न हो :
'खामेमि सव्व जीवे, सव्वे जीवा खमंतु मे।
मित्ती मे सव्वभूएसु, वैरं मज्झं न केणइ।'
भारमुक्त मन : इस सूत्र को आत्मसात करने पर ही मन हल्का और भारमुक्त होता है।
सद्भाव की भावना : किसी प्राणी के साथ वैर भाव न रहे, सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्री भाव बना रहे।
७. ग्रंथि विमोचन और सम्यक्त्व की सुरक्षा : इंसान पारिवारिक, सामाजिक और सामुदायिक जीवन जीता है। जीवन के लंबे सफर में किसी के भी प्रति उच्चावच भाव आया हो, अनुचित व्यवहार हुआ हो या वचन की चोट लगी हो।
कर्म ग्रंथि का विमोचन : भीतर की गांठें खोलकर क्षमायाचना करने से ही कर्मों की ग्रंथि का विमोचन होता है।
सम्यक्त्व की सुरक्षा : आगमों में बताया गया है कि यदि श्रावक किसी के साथ वैर-विरोध रखकर इस दिन क्षमायाचना नहीं करता, तो उसका सम्यक्त्व सुरक्षित रहना भी असंभव हो जाता है।