रचनाएं
क्षमा के एयरपोर्ट से उड़ान भरे मोक्षनगर की
आप अहम् बनना चाहते हैं या अर्हम्? अहम् और अर्हम् दोनों एक साथ नहीं रह सकते। जहाँ दोनों एक साथ हों वहाँ तर्क और तकरार रहती है। अहम् को हटाएँ, अर्हम् को जगाएँ। सत्य, शिव और सौन्दर्य हमारे सामने नजर आयेगा। हमारे जीवन का उद्देश्य है - नर से नारायण बनना, आत्मा से परमात्मा, जन से जिन, बिन्दु से सिंधू एवं लघु से विराट होना। मानवीय परिवेश में कभी तनाव, अवसाद हो सकता है। पर गाँठ बाँधकर न रखें। मनोमालिन्य को भुलाना सीखें। 'सहन करो - सफल बनो'।
महान व्यक्तित्वों के प्रेरक प्रसंग :
१. समर्थ रामदास: समर्थ रामदास भिक्षा के लिए एक घर में गये और 'भिक्षां देहि' आवाज लगायी। गृहस्वामिनी तनाव में थी। उसने आवेश में आकर रसोई साफ करने का मसौता भिक्षु के मुंह पर फैंक दिया। समर्थ गुरु नाराज नहीं हुए। बिना किसी प्रतिक्रिया के उस मसौते को नदी तट पर रगड़-रगड़ कर साफ किया, बाती बनाई और शाम को दीपक में जलाकर आरती करने लगे। उन्होंने कामना की — प्रभु! जिस प्रकार ये बत्ती अंधकार का विनाश कर रही है, उसी प्रकार गृहस्वामिनी के भीतर ज्ञान और क्षमा का प्रकाश पैदा हो। यह है सहिष्णुता और क्षमाशीलता की पराकाष्ठा।
२. वैज्ञानिक दृष्टिकोण (एडिसन व न्यूटन): 67 वर्ष की उम्र में एडिसन की करोड़ों रुपयों की फैक्ट्री में आग लग गई, पर वे हताश नहीं हुए और तीन सप्ताह बाद फोनोग्राफ का आविष्कार किया। न्यूटन के पालतू कुत्ते ने मोमबत्ती गिरा दी जिससे शोध पत्र स्वाहा हो गए, फिर भी न्यूटन ने संकल्प किया कि फिर से नए सिरे से काम शुरू करेंगे। कूल-कूल रहने की आदत से इंसान ऊर्जावान बन सकता है।
३. सूकरात एवं संत तुकाराम : सूकरात देर से घर आए तो पत्नी ने गालियां दीं।सूकरात ने मुस्कुराकर स्थिति संभाली। 'पहले बादल गरजते हैं फिर बरसते हैं'— इस वाक्य ने माहौल शांत कर दिया। संत तुकाराम घर लौटते वक्त गन्ने बांट रहे थे। एक गन्ना बचा तो पत्नी ने गुस्से में सिर पर दे मारा और गन्ने के दो टुकड़े हो गए। संत ने कहा — हम दो जने खाने वाले थे, तुमने दो टुकड़े कर दिए।
क्षमा की महिमा और सम्यक्त्व का मार्ग:
आचार्य भिक्षु ने कहा है कि मित्र से मित्रता और शत्रु से शत्रुता का अनुबंध चलता रहता है, जिसे मिटाने का उपाय क्षमा याचना है।
–अंग्रेज़ी का शब्द ‘Sorry’ आपसी तनाव और अवसाद को समाप्त करता है।
–‘खमत खामणा’ जैन परंपरा का सर्वोच्च शब्द है, जो तन-मन के मैल को साफ़ करता है। संवत्सरी को क्षमा याचना न करें तो समकित संदिग्ध हो जाता है।
–जैन धर्म की शुरुआत ही ‘नमामि’ और ‘खमामि’ से होती है। तनाव में गांठ बांधना सहज है पर उसे खोलना जीवन की महान कला है।
पूज्य गुरुदेव तुलसी मेवाड यात्रा कर रहे थे। एक विवाद को मिटाने के लिए उन्होंने एक भाई को समझाया तो क्षमा भाव जागते ही विवाद की गांठे खुल गईं।
एक कवि ने लिखा है—
'क्षमा शस्त्रं करे यस्य, दुर्जनः किं करिष्यति।
अतृणे पतितो लह्निः, स्वयमेवोपशाम्यति॥'
क्षमा रूपी शस्त्र जिसके हाथ में है, दुर्जन उसका क्या अनिष्ट कर सकता है? दाँत कठोर होते हैं इसलिए पहले चले जाते हैं, जीभ
नरम होती है इसलिए जीवन भर साथ निभाती है। मीरां ने समभाव से जहर पिया, मघवागाणि ने निंदा को न सुनकर क्षमा का परिचय दिया। प्रसन्नता का Tonic सदा साथ रखें। सकारात्मक सोच ने उनको हमेशा Be Positive बनाए रखा। जीवन बोझ नहीं महोत्सव है।