आष्टांगिक साधना के शिखर पर फहराया वीतरागता का ध्वज, मैत्री के रंग में रंगा तेरापंथ : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 16 सितम्बर, 2026

आष्टांगिक साधना के शिखर पर फहराया वीतरागता का ध्वज, मैत्री के रंग में रंगा तेरापंथ : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के ११वें अधिशास्ता, तीर्थंकर प्रभु महावीर के प्रतिनिधि, शांतिदूत, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की पावन सन्निधि में पर्वाधिराज पर्युषण के शिखर दिवस की मंगल आराधना के पश्चात बुधवार को 'क्षमापना पर्व' अगाध उल्लास, नम्रता व आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। प्रातः सुधर्मा सभा में सूर्योदय से पूर्व ही श्रावक-श्राविकाओं की विराट उपस्थिति के बीच महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी एवं युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी मंचासीन हुए। पूज्य आचार्यश्री द्वारा वृहद् मंगल पाठ के उच्चारण के साथ ही ऐतिहासिक क्षमापना कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
पूज्य आचार्यश्री का पावन पाथेय एवं ऐतिहासिक खमत-खामणा प्रसंग :
१. शिखर पर ध्वजारोहण सम 'क्षमापना': पावन पाथेय प्रदान करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि हमने पर्युषण पर्व की आष्टांगिक आराधना की। कल भगवती संवत्सरी की आराधना हुई। आज का यह दिन मानो शिखर पर चढ़कर ध्वजारोहण करने का समय है। प्रतिक्रमण में ८४ लाख जीव योनियों से खमत-खामणा हो जाता है, परंतु जिनके साथ दैनिक व्यवहार व काम पड़ता है, उनसे यदि व्यावहारिक खमत-खामणा हो जाए तो जीवन का एक अध्याय पूरा हो जाता है।
२. युवाचार्य श्री व साध्वी प्रमुखा जी से बारंबार क्षमा याचना : पूज्यश्री ने अत्यंत विनम्र भाव से फरमाया— 'संघीय कार्य की दृष्टि से युवाचार्य श्री महावीर कुमार से सबसे ज्यादा निकटता से काम पड़ता रहता है। दिन-रात अनेक कार्य करवाने पड़ते हैं। इस दौरान कोई कटु या जल्दबाज़ी में कुछ कह दिया हो और इन्हें अप्रिय लगा हो, तो युवाचार्य जी से हमारा बारंबार खमत-खामणा।' युवाचार्य श्री ने भी तत्क्षण पूज्यश्री को वंदन कर खमत-खामणा किए। इसी प्रकार साध्वी प्रमुखा जी एवं साध्वीवर्या जी से मीटिंग व कार्यों के दौरान हुई किसी भी अप्रियता हेतु पूज्यश्री ने बारंबार खमत-खामणा किए।
३. समस्त चराचर जगत से क्षमापना : आचार्यश्री ने गुरुकुलवास व बहिर्विहारी संतों, साध्वी समुदाय, समणी वृंद, मुमुक्षु भाई-बहनों, संपूर्ण श्रावक-श्राविका समाज, जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, प्रवास व्यवस्था समिति लाडनूँ, केंद्रीय संस्थाओं, कल्याण परिषद, जैन शासन के अन्य आचार्यों, जैनेतर धर्मगुरुओं, गणमुक्त साधुओं, सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र के लोगों, कर्मचारियों तथा संपूर्ण चराचर जगत से भावपूर्ण खमत-खामणा किए।
युवाचार्य श्री, साध्वीप्रमुखा श्री, साध्वीवर्याजी के विचार :
१. युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी : आज का दिन व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) रूप में खमत-खामणा करने का दिन है। पूज्य आचार्यश्री जैसे महान क्षमा के सागर के सामीप्य में हम भी अपने अंतःकरण को राग-द्वेष के भावों से मुक्त करने का प्रयास करें।
२. साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी : क्षमा के द्वारा उलझी हुई गाँठों को सुलझाया जा सकता है, जख्मों को भरा जा सकता है और संबंधों को मधुर बनाया जा सकता है। क्षमा आत्मा का मूल स्वभाव है।
३. साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी : सरलता और विनम्रता की धरती पर ही क्षमा के फूल उग सकते हैं। जीवन में सरलता को आत्मसात करके ही क्षमा का आदान-प्रदान संभव है।
(तत्पश्चात साध्वीप्रमुखा जी, साध्वी वृंद, समणी वृंद व युवाचार्य श्री ने एक-दूसरे से एवं पूज्य आचार्यश्री से सविधि खमत-खामणा किए।)
संस्थाओं एवं चारित्रात्माओं द्वारा उद्गार व क्षमापना:
अणुव्रत समिति से शांतिलाल बैद, पारमार्थिक शिक्षण संस्था से बजरंग जैन, अमृतवाणी अध्यक्ष मदनचंद दूगड़, जैन विश्व भारती अध्यक्ष अमरचंद लूँकड़, जैन विश्व भारती संस्थान (यूनिवर्सिटी) के कुलपति बच्छराज दूगड़, आचार्य भिक्षु समाधि स्थल सिरियारी मंत्री मर्यादा कोठारी, तथा योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति लाडनूँ के अध्यक्ष प्रमोद बैद आदि ने अपने भक्तिभावपूर्ण विचार व्यक्त किए।
परस्पर खमत-खामणा एवं कार्यक्रम की संपन्नता :
१. चारित्रात्माओं व समाज का परस्पर खमत-खामणा : संत समुदाय की ओर से मुनि दिनेश कुमार जी ने साध्वी समुदाय से तथा साध्वी समुदाय की ओर से साध्वी जिन प्रभा जी ने संत समुदाय से खमत-खामणा किए।
२. श्रावक-श्राविका समाज : प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री निर्मल कोटेचा ने श्राविका समाज से तथा श्राविका समाज की ओर से कनक बरमेचा ने श्रावक समाज से खमत-खामणा किए। अंत में आचार्य श्री महाश्रमण जी के मंगल पाठ के साथ यह पावन क्षमापना पर्व सुसंपन्न हुआ।