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सामायिक में श्रावक जीता है मुनि जैसा जीवन
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई द्वारा मंगलाचरण से हुआ। मंगलाचरण के माध्यम से वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने निर्धारित समय में समायिक साधना कर आत्मनिरीक्षण, संयम एवं आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में कदम बढ़ाया। समायिक दिवस के अवसर पर साध्वीश्री ने अपने प्रवचन में समायिक के आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। शासनश्री साध्वी कंचनप्रभाजी ने ससम्मान संविधान को व्याख्यायित किया, और उसके साथ स्वयं के जीवन को सौभाग्यशाली माना कि जैन शासन का गौरव है एक गुरु के नेतृत्व में चरित्र की परिपालना। आपने आगे कहा कि आज पर्युषण महापर्व के उपलक्ष्य में हमारा सामायिक दिवस है। सामायिक अनुष्ठान में समर्पित श्रावक एक मुहूर्त के लिए मुनि जैसा जीवन जीता हुआ सांसारिक कामों से उपरत हो जाता है। साध्वीश्री ने ठाणं सूत्र के आधार पर अच्छेरों का वर्णन सुनाया जो पूरे समाज के लिए सर्वथा विशिष्ट था। शासनश्री साध्वी मंजुरेखाजी ने कहा - सामायिक यानि समता को प्रतिष्ठित करना, आप सभी जानते हैं कि समता के बिना, परिवार और समाज नहीं चल सकता यह शाश्वत सत्य है। इसके साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में भी समता बहुत जरूरी है क्योंकि आज जितने भी अपराध हो रहे हैं वे ईगो के कारण बढ़ता हुआ क्रोध इंसान की जिंदगी बिगाड़ देता है, जरूरी है क्रोध का शमन करें। साध्वी मंजूरेखाजी, साध्वी उदितप्रभाजी, साध्वी निर्भयप्रभाजी, साध्वी चेलनाश्रीजी ने एक मधुर गीत के द्वारा पूरा माहौल आध्यात्मिक बना दिया। साध्वी चेलनाश्री जी ने सामायिक दिवस के उपलक्ष्य में सुन्दर प्रस्तुति दी। समायिक दिवस का यह आयोजन उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के लिए आत्मचिंतन, संयम और साधना की प्रेरणा लेकर आया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद से राष्ट्रीय सहमंत्री अंकुर लुणीया, प्रकाशन प्रभारी महेश परमार तथा ज़ोनल कॉर्डिनेटर कमलेश भंसाली की विशेष उपस्थिति रही। यह जानकारी दक्षिण मुंबई सभा मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ एवं तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी।