संस्थाएं
तप के लिए शरीर बल नहीं, मनोबल जरूरी
धर्म नगरी के अमृत सभागार में प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा जी के बालोतरा चातुर्मास में अनेक तपस्या हुई उसी श्रृंखला में श्राविका संतोष भंडारी ने सिद्धि तप सम्पन्न का पच्चक्खाण किया। तप अनुमोदन समारोह में साध्वीश्री ने कहा- इस कठिन तप को बहन ने किया है, यह भी तप बड़ा विशाल है। बहन संतोष भंडारी के संकल्प बल को हम साधुवाद देते हैं। समुत्व और शान्त भाव के साथ वह सिद्धि तप के सोपान पर चढ़ती रही और आज लक्ष्य के निकट है। साध्वीश्री ने कहा तप में शरीर बल की अपेक्षा मनोबल आवश्यक है। तप इन्द्रिय विजय कठिन साधना है, आत्मा की पवित्र अराधना है। कर्म निर्जरा के साथ स्वस्थता का महत्त्वपूर्ण मंत्र है। तप का उम्र से कोई तकीजा नहीं है। तप से आत्मा की सुरक्षा होती है। शक्ति का संवर्धन होता है। तपस्वी अपनी भावना से आगे बढ़ता है. पर पारस्परिक सहयोग अपेक्षित है। प्रेरणा देते हुए साध्वी श्री ने कहा-भंडारी परिवार को तप अनुमोदन में तप-संकल्पित होना चाहिए। साध्वी सुदर्शन प्रभा, साध्वी चैतन्य प्रभा और साध्वी शौर्य प्रत्रा ने सामूहिक संगान करके तप की अनुमोदना की। तेरापंथ सभा मंत्री मोहन बाफना ने बहन संतोष को तप की बधाई देते हुए आध्यात्मिक मंगलकामना प्रेषित की। तेरापंथ सभा पूर्वाध्यक्ष महेन्द्र वेदमुथा ने साध्वी प्रमुखा श्री द्वारा प्रदत्त संदेश का वाचन किया। सभा अध्यक्ष राणमल फोला मेहता ने तप- अभिनन्दन पत्र का वाचन किया। साध्वी मंगलप्रज्ञा जी की प्रेरणा- 'तप से हो तप का अभिनन्दन' को बहुमान देते हुए अनेक भाई बहनों ने तप का संकल्प किया।