आयंबिल तप से जागृत होती है आत्मचेतन

संस्थाएं

जयपुर।

आयंबिल तप से जागृत होती है आत्मचेतन

आयोजन मुनि तत्त्व रुचि जी एवं मुनि संभव कुमार जी के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। मुनि श्री ने आयंबिल तप की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए फरमाया कि तप आत्मशुद्धि का मार्ग है। एक आयंबिल करने से 100 करोड़ वर्षों के पाप कर्मों का क्षय हो जाता है। सामूहिक आयंबिल के माध्यम से श्रावक-श्राविकाओं ने न केवल तप की आराधना की, बल्कि सामूहिक धर्मसाधना, एकता एवं आध्यात्मिक प्रेरणा का अनुपम अनुभव भी प्राप्त किया। इस तप आयोजन में 3 भाइयों एवं 48 बहनों ने बड़े उत्साह के साथ सामूहिक आयंबिल तप किया।
जोड़े सहित एवं पूरे परिवार के साथ आयंबिल करने वाले तपस्वियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंडल की अध्यक्ष कौशल्या जैन एवं मंत्री पायल जैन ने सभी बहनों का स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम में मंडल की बहनों का उत्साह, श्रम एवं अनुशासन सराहनीय रहा। अंत में अध्यक्ष कौशल्या जैन एवं मंत्री पायल जैन द्वारा सभी तपस्वियों के तप की अनुमोदना की गई।