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तप की ऊर्जा से काया कुन्दन बन जाती है
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या 'शासनश्री' साध्वी सुमनश्री जी के सान्निध्य में मासखमण तप अनुमोदन समारोह मनाया गया। 'शासनश्री' साध्वी सुमनश्री जी ने भगवान महावीर के पूर्व भवों की यात्रा के प्रसंग में बताया कि धार्मिक करणी का भौतिक सुखो के साथ सौदा करना निदान कहलाता है। निदान शल्य है कांटा है, जिसका फल बड़ा कटु होता है। इस निदान से भव परम्परा बढ़ जाती है। भगवान महावीर की आत्मा ने 16 वें भव में निदान किया था वह इस त्रिपृष्ट वासुदेव के भव में वन के राजा केशरी सिंह को मारकर पूरा किया।
हिंसा आखिर हिंसा ही होती है उस हिंसा से जो कर्य कालिमा लगती है उसका फल अवश्य भोगना पड़ता है। साध्वी सुरेखा ने जप दिवस पर बोलते हुए कहा कि -जप और तप दो बहुत छोटे शब्द है किन्तु इसमें अध्यात्म का सार समा-हित है। जो जन्म-मृत्यु को विच्छेद करें और पाप कर्मों का नाश करें हर व्यक्ति के पास मनोबल मंत्रबल और इष्टबल ये तीनबल अवश्य होने चाहिए। मंत्र शक्ति से पवित्र आभामंडल का निर्माण दुष्ट शक्तियों का निग्रह ईष्ट शक्तियों का आह्वान और आधि व्याधि उपाधियों का निवारण हो सकता है। नमस्कार महामन्त्र सब मन्त्रों का राजा है। इसका विधिवत शुद्ध उच्चारण के साथ स्मरण करने से हम शक्ति सम्पन्न बन जायेंगे। साध्वी मधुरलता ने मधुर गीत गाया। मासखमण तप में संलग्न पवन कुमार चौरड़िया ने 28 की तपस्या का पचक्खाण लिया। संचालन रोहिणी सभा के मंत्री पराग जैन ने किया।