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पर्युषण : आठ दिन, आठ संदेश, आत्म-विजय का पर्व
तेरापंथ भवन में मुनि मोहजीत कुमार, मुनि जयेश कुमार और मुनि भव्य कुमार के सानिध्य में आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व का आयोजन हुआ।
दिवस 1: खाद्य संयम दिवस – मुनि मोहजीत कुमार ने बताया कि पर्युषण का अर्थ कषायों के उपशमन, भौतिक प्रवृत्तियों से अलगाव और आत्म-साधना से है। मुनि जयेश कुमार ने जोर दिया कि भोजन का लक्ष्य स्वाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और साधना होना चाहिए। आहार का संयम ही शारीरिक और आध्यात्मिक साधना का मूल आधार है। इस दिन प्रभु ऋषभदेव के जीवन दर्शन पर भी विशेष प्रकाश डाला गया।
दिवस 2: स्वाध्याय दिवस – मुनि मोहजीत कुमार ने कहा कि स्वाध्याय से ज्ञानावरणीय व दर्शनावरणीय कर्मों का क्षय होता है और नए विचारों का सृजन होता है। मुनि जयेश कुमार ने कहा कि सत्-शास्त्रों के पठन और अनुप्रेक्षा से कल्पनाशक्ति बढ़ती है तथा निष्क्रिय मस्तिष्क सक्रिय बनता है।
दिवस 3: सामायिक दिवस – मुनि भव्य कुमार ने अभिनव सामायिक का प्रयोग कराया। मुनि मोहजीत कुमार ने सामायिक को संवर और शोधन की प्रक्रिया बताया, जिससे वीतरागता की दिशा में पहला कदम बढ़ता है। मुनि जयेश कुमार ने कहा कि शांत रहना ही संत होने की पहचान है और सामायिक जीवन को समतामय बनाने का कल्पप्रयोग है। सांझ को प्रभु सुमतिनाथ के जीवनवृत्त का चित्रण हुआ।
दिवस 4: वाणी संयम दिवस – मुनि मोहजीत कुमार ने वाणी को व्यक्तित्व का दर्पण बताते हुए कहा कि बोलना कला है पर मौन एक महान तप है।
मुनि जयेश कुमार ने कहा कि दूसरों को समझने के लिए सुनना और तोल-मोल कर बोलना आवश्यक है। मुनि भव्य कुमार ने आगम सूत्रों के माध्यम से सामाजिक क्रियाकलापों के सुधार पर बल दिया।
दिवस 5 : व्रत चेतना दिवस – मुनि मोहजीत कुमार ने कहा कि व्रतों की आराधना से मनोबल और आत्मबल बढ़ता है। मुनि जयेश कुमार ने स्पष्ट किया कि इतिहास केवल त्यागियों का नाम याद रखता है, भोगियों का नहीं; त्याग और तप ही अमर बनते हैं। मुनि भव्य कुमार ने जनजीवन को व्रत की संस्कृति को आत्मसात् करने की प्रेरणा दी।
दिवस 6 : जप दिवस – मुनि मोहजीत कुमार ने 'जप' का अर्थ बताते हुए कहा कि 'ज' से जन्म का विच्छेद और 'प' से पापों का नाश होता है। मुनि जयेश कुमार ने कहा कि जब मंत्र में विधि, लय और सच्ची भावना का पुट मिलता है, तभी उसमें अपरिमित प्राणशक्ति का संचार होता है। इस अवसर पर भगवान अरिष्टनेमि के जीवन प्रसंग प्रस्तुत किए गए।
दिवस 7: ध्यान दिवस – मुनि मोहजीत कुमार ने प्रेक्षाध्यान के जरिए चित्त की निर्मलता और काया की स्थिरता पर जोर दिया। मुनि जयेश कुमार ने कहा कि आज के वैज्ञानिक युग में धर्म को प्रयोग और कसौटी पर कसने के लिए ध्यान के माध्यम से अंतर्जगत में जाना जरूरी है। इस दिन 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने बड़ी तपस्या का प्रत्याख्यान किया।
दिवस 8: संवत्सरी महापर्व – अंतिम दिन साढ़े आठ घंटे चले निरंतर प्रवचन क्रम में मुनि वृंदों ने आत्मचिंतन, संकल्प और संयम का संदेश दिया। मुनि जयेश कुमार ने संवत्सरी को पूरे वर्ष का लेखा-जोखा बताते हुए तेरापंथ के 11 आचार्यों का संक्षिप्त जीवन वृत्त प्रस्तुत किया। मुनि मोहजीत कुमार ने भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा का प्रभावी वर्णन किया। इस महापर्व पर सैकड़ों उपवास, पौषध और उत्कृष्ट तपस्याएँ सम्पन्न हुईं।