महापर्व में अध्यात्म का नया नजारा

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चेम्बूर।

महापर्व में अध्यात्म का नया नजारा

तेरापंथ समाज में प्रथम बार अत्यंत नव्य वातावरण में महापर्व की आराधना की गई। ग्रांड नालंदा बैंक्वेट के दोनों सभागारों में प्रतिदिन उमड़ती भीड़ जनता के उत्साह एवं विश्वास की द्योतक रही। एक ही प्रांगण में करीब 10 घंटे लगातार व्याख्यानमाला व 500 से अधिक पौषध से एक कीर्तिमान ही बन गया।
खाद्य संयम दिवस - पर्युषण पर्व का आगाज नए अंदाज में हुआ। सैकड़ों भाई-बहनों ने द्रव्य संयम आदि का संकल्प लिया। 90 भाई-बहनों ने अट्ठम तप व करीब 51 भाई-बहन अठाई व उससे आगे तप में जुड़े। विदुषी साध्वी निर्वाणश्रीजी ने भगवान महावीर के 'नयसार' के भव की व्याख्या के साथ अध्यात्म यात्रा का निरूपण किया। साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा जी ने भगवान ऋषभ के पूर्वजन्मों की मार्मिक प्रस्तुति दी। साध्वी लावण्यप्रभाजी ने खाद्यसंयम की महिमा बताई। साध्वी मधुरप्रमाजी ने विषय से संबद्ध गीत की प्रस्तुति दी।
स्वाध्याय दिवस - पर्युषण के द्वितीय दिन स्वाध्याय की प्रेरणा देते हुए विदुषी साध्वी निर्वाणश्रीजी ने भगवान महावीर के पूर्व जन्मों की अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
सामायिक दिवस - सामायिक पचरंगी, अभिनव सामायिक आदि के साथ-साथ मुख्य प्रवचन में साध्वी निर्वाणश्री जी की सारगर्भित प्रस्तुति, साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने भगवान शांतिनाथ चरित्र व 63 शलाका पुरुष व साध्वी मुदितप्रभाजी ने सामायिक व साध्वी कुंदनयशाजी ने गीत की प्रस्तुति दी।
वाणी संयम दिवस - वाणी के संयम की चर्चा करते हुए विदुषी साध्वी निर्वाणश्रीजी ने वाणी संयम क्यों करें, कैसे करें की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने वर्तमान परिस्थिति में तीर्थंकरों के उपदेश की प्रासंगिकता बताते हुए भगवान शांतिनाथ की जीवन झांकी प्रस्तुत की।
व्रतचेतना दिवस - साध्वी योगक्षेमप्रभा जी ने अव्रत का महासागर और व्रतों की नौका की प्रस्तुति के साथ भ. अरिष्टनेमि के पूर्व जन्मों की सरस प्रस्तुति दी। विदुषी साध्वी निर्वाणश्री जी ने भगवान महावीर के आध्यात्मिक आरोहण व बारह व्रतों के संदर्भ में विवेचन किया।
जप दिवस - कार्यक्रम का शुभारंभ विक्रोली महिला मंडल के गीत से हुआ। विदुषी साध्वी निर्वाणश्रीजी, साध्वी योगक्षेमप्रभाजी, साध्वी कुंदनयशाजी ने वक्तव्य की अभिव्यक्ति दी। ते. सभा मुंबई से अध्यक्ष सुरेन्द्र ने भाव प्रकट किए।
भगवती संवत्सरी - प्रातः 6:00 बजे से ही श्रद्धालुओं के बढ़ते सैलाब व आठ-प्रहरी पौषध के साथ श्रोताओं की उपस्थिति मनमोहक रही। नालंदा बैंक्वेट के दोनों तल जनता से आकर्षित रहे। एक-एक कर सभी साध्वीवृंद की प्रस्तुति से श्रोता करीब 10 घंटे तक जमे रहे।