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सामायिक ऐसा उपक्रम जिससे होता है आत्मजागरण
पर्युषण महापर्व में सामायिक दिवस श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी पावनप्रभाजी ठाणा-4 के सानिध्य में श्रावक-श्राविकाओं ने सामायिक तप की आराधना की। साध्वी पावनप्रभाजी ने अपने मंगल उदबोधन में कहा चतुर्दशी है आज मुंह में अष्टमी चतुर्दशी पूर्णिमा एवं अमावस्या इन तिथियां को महत्वपूर्ण माना है । त्याग तप और जप के द्वारा आराधना करनी चाहिए, आचार्य भिक्षु ने मर्यादा पत्र लिखा।
चतुर्थ जयाचार्य ने मर्यादा पत्र का एक क्रम निश्चित किया। जिसे हम हाजरी कहते है। ढाई सौ वर्ष पूर्व आचार्य भिक्षु ने जो मर्यादा पत्र बनाई, आज तेरापंथ धर्म संघ मर्यादा अनुशासन सेवा और संगठन की मजबूत नीव पर खड़ा है। वर्तमान में आचार्य महाश्रमण जी के अनुशासन में यह संघ अपनी गति प्रगति कर रहा है। भगवान महावीर के कई पूर्व भवों का वर्णन करते हुए कालजयी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। साध्वी उन्नतयशा जी ने उत्तराध्ययन सूत्र के आधार पर भगवान महावीर के सिद्धांतों में वर्णित आत्मवाद एवं पुनर्जन्मवाद का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि कर्मों की गति अत्यंत बलवान होती है। व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगते हुए संसार में परिभ्रमण करता है तथा सुख-दुःख का अनुभव करता है। कर्मों से मुक्ति के लिए आत्मजागरण एवं साधना आवश्यक है। साध्वी रम्यप्रभाजी ने सामायिक के महत्व को समझाते हुए कहा कि प्रत्येक श्रावक-श्राविकाओं को भाव सामायिक की आराधना करनी चाहिए। सामायिक ऐसा आध्यात्मिक उपक्रम है, जिसके माध्यम से व्यक्ति में समता, संयम एवं आत्मनिरीक्षण का विकास होता है। कार्यक्रम का संचालन सभा के मंत्री सुभाष पोखरणा ने किया।