संस्थाएं
ज्ञानशाला ज्ञान का मंदिर व संस्कार शाला है
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-३ के सान्निध्य में बृहत्तर कोलकाता स्तरीय ज्ञानशाला दिवस का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश गोयल आदि गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर उत्तर हावड़ा, दक्षिण हावड़ा, पूर्वांचल, दक्षिण कोलकाता, टॉलीगंज, बेहला, उत्तर कोलकाता, साल्टलेक, मध्य-उत्तर कोलकाता, लिलुआ, बाली-बेलुड़, उत्तरपारा, हिन्दमोटर, रिषड़ा सभा क्षेत्र की ज्ञानशालाओं से लगभग ३०० ज्ञानार्थी व १११ प्रशिक्षिकाएँ उपस्थित रही। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए 'ज्ञानशाला: संस्कारों के जागरण की शाला' विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा - पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित बाल मन में आध्यात्मिक संस्कारों की कमी साफ परिलक्षित होती है। ऐसे वातावरण में बाल पीढ़ी को सुसंस्कारी बनाने के लिए आचार्य तुलसी ने ज्ञानशाला का महान उपक्रम दिया। जो निश्चित ही बाल पीढ़ी के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। समय समय पर बाल पीढ़ी को अहिंसा, सत्य, मैत्री, सहिष्णुता आदि के संस्कार देने चाहिए। संस्कार जीवन की धरोहर व संपदा है। संस्कारों के अर्जन का समय बचपन है। बचपन बाल पीढ़ी को सुसंस्कारी व चरित्रवान बनाने के लिए ज्ञानशाला के लिए अभिप्रेरित करना चाहिए। 'ज्ञानशाला ज्ञान का मंदिर व संस्कारों की पौध है।' ज्ञानशाला से बालकों के व्यक्तित्व में निखार आता है। अनेक प्रकार की कलाओं का विकास होता है। ज्ञानशाला सुसंस्कारशाला व चरित्रशाला बने। मुनि ने आगे कहा व्यक्ति के निर्माण में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। बालक संस्कारी है तो घर परिवार में शांति रहेगी। हम जैन हैं, तेरापंथी हैं हमारी परंपरा व संस्कृति सुरक्षित रहे। देव, गुरु, धर्म के प्रति आस्था रखें। ज्ञानशाला महासभा का विशिष्ट प्रकल्प है। स्थानीय संस्थाएं प्रशिक्षिकाएं व व्यवस्थापक जिम्मेदारी पूर्वक कार्य कर रहे हैं।इस अवसर पर मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं के मंगलाचरण से हुआ।