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पौधे की तरह बच्चों में भी संस्कारों की सिंचाई जरूरी
ज्ञानशाला संयोजिका कृष्णा जैन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा की जैसे एक पौधे की अच्छे से देखभाल की जाए तो वह सुगंधित फूल और फल हमें प्रदान करता है वैसे ही बचपन में बच्चों में अच्छे संस्कार डाले जाएं तो एक अच्छा नागरिक परिवार समाज और देश को मिलता है। हमारे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महासभा के उड़ीसा के आंचलिक प्रभारी छत्रपालजैन का स्थानीय सभा अध्यक्ष दीपक जैन ने दुपट्टा से सम्मान किया। मुख्य अतिथि महोदय छत्रपाल जैन ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव को रोकने के लिए आचार्य श्री तुलसी जी ने 1995 को बच्चों में सद संस्कार के लिए ज्ञानशाला का शुभारंभ किया। छत्रपाल जी ने प्रशिक्षिका बहनों का निस्वार्थ भाव से ज्ञानशाला में सेवा देने के लिए बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद किया। सभा के पूर्व अध्यक्ष गौतम जैन ने भी अपने विचार रखते हुए ज्ञानशाला प्रशिक्षिका बहनों की बहुत प्रशंसा की । अभिभावक लोगों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ज्ञानशाला में बच्चों को त्याग प्रत्याख्यान करवाया जाता है एवं विभिन्न प्रतियोगिता के माध्यम से उनके व्यक्तित्व का विकास होता है हमारे बच्चे को ज्ञानशाला से अच्छे संस्कार के साथ-साथ और भी बहुत कुछ सीखने मिलता है।श्रेष्ठ दो विचारों को भी सम्मानित क पुरस्कृत किया गया । कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रशिक्षिका डॉक्टर इतिश्री अग्रवाल ने किया।