आचार्य तुलसी विकास के शलाका पुरुष, मानवता के मसीहा थे

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उत्तर हावड़ा।

आचार्य तुलसी विकास के शलाका पुरुष, मानवता के मसीहा थे

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में 33वें विकास महोत्सव का भव्य आयोजन उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में आयोजित हुआ। इस अवसर पर विकास परिषद् के सदस्य बनेचंद मालू विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- आचार्य तुलसी विकास के शलाका पुरुष थे। वे मानवता के मसीहा व शांति के पैगम्बर थे। वे गति, प्रकाश व ऊर्जा के पर्याय थे। जिनका मन सुनता था, आँखें बोलती थीं और वाणी देखती थी। वे दिव्य दृष्टि सम्पन्न सत्य की साधना और शोध में निरत रहने वाले एक तेजस्वी व्यक्तित्व थे। वे व्यापक सोच उदार दृष्टि कोण वाले जनप्रिय नेता थे। उनके आचार्य पद ग्रहण दिवस को वर्तमान में तेरापंथ धर्मसंघ विकास महोत्सव के रूप में मनाता है। विकास महोत्सव की परिकल्पना आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने की। जिसकी स्वीकृति स्वयं गुरुदेव तुलसी ने प्रदान की। उन्होंने आगे कहा - विकास का मूल आधार 'आचार, अप्रमाद, अनुशासन व एक आचार्य का नेतृत्व' है। तेरापंथ विकास शील संघ है। अपने जन्म काल से लेकर आज तक वह निरंतर विकास करता रहा है। आचार्य श्री तुलसी ने वर्तमान का मूल्यांकन किया और इसी कारण वे महान बने। आस्था, सम्यक् दृष्टिकोण, स्वाध्याय, ध्यान, मानसिक प्रसन्नता आदि विकास के सूत्र हैं। विकास का प्राण तत्व है - अनुशासन मर्यादा और व्यवस्था। आचार्य तुलसी ने शिक्षा, महिला जागरण, अणुव्रत आंदोलन, साहित्य, नया मोड़, श्रमण श्रेणी, उपासक श्रेणी, ज्ञानशाला आदि अनेक विकास के आयाम धर्मसंघ को प्रदान किया। इस अवसर पर मुनि कुणाल कुमार ने सुमधुर गीत का संगान किया। स्वागत भाषण उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष संदीप डागा ने दिया।