युगप्रधान ने युगधारा को दिए नए अवदान

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उधना।

युगप्रधान ने युगधारा को दिए नए अवदान

आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी परमयशा जी के सांनिध्य में '33वां विकास महोत्सव' का समायोजन हुआ। डॉ. साध्वी परमयशा जी ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि गुरुदेव तुलसी राष्ट्रसंत का उद्घोष था। इंसान पहले इंसान, फिर हिंदू या मुसलमान। उनकी मैत्री, विशुद्ध वैराग्य और करुणा ने देश के दिग्गजों को प्रभावित किया। नास्तिकों को आस्तिक बना दिया। उनके करिश्माई व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनके चरणों में आते जैन और अजैन, हिंदू-मुस्लिम, भक्त और अभक्त, सांसद और विधायक। अध्यात्म के शिखर पुरुष का हर पहलू दिव्य और भव्य था, जिसमें झलकती थी बुद्ध की करुणा, ईसा का प्रेम, गांधी का सत्याग्रह और महावीर का अहिंसा दर्शन। स्वप्नद्रष्टा गुरुदेव ने प्रगति के नए सितारे सजाए, संघ को Bright future दिया। उन्होंने कभी मनाया संयम वर्ष तो कभी अनुशासन वर्ष, कभी प्रेक्षा वर्ष तो कभी योगक्षेम वर्ष, कभी स्वाध्याय वर्ष तो कभी अणुव्रत वर्ष, भिक्षु चेतना वर्ष। ऐसे थे अद्भुत अवधूत हमारे गुरुवर। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल ने मंगलाचरण से की। तेरापंथ सभा के सदस्यों ने 'वंदना नंदन तुलसी जगत में कमाल करग्यो' गीत का संगान किया। ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं ने 'शासन शेखर का जीवन है मनभावन' गीत का संगान अपनी सुमधुर स्वर-लहरियों के साथ किया। साध्वी विनम्रयशा जी और साध्वी मुक्ताप्रभा जी ने कविता के माध्यम से अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। क्षमा लेना और देना हमारी संस्कृति