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मन का जुड़ाव हो तो चार पीढ़ियां भी प्रेम से रह सकती हैं साथ
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या शासन श्री साध्वी विद्यावती जी 'द्वितीय' ठाणा 5 के सानिध्य में अभिनव कार्यशाला का आयोजन तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के तत्वावधान में किया गया। कांदिवली तेरापंथ सभा के अध्यक्ष मीठालाल धाकड़ ने स्वागत वक्तव्य दिया। साध्वी प्रियंवदा जी ने कार्यशाला का विषय Two Generation One Connection (दो अनुभव एक जुड़ाव) पर उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा — पीढ़ी चाहे कोई भी हो, पर मन से पीढ़ी का जुड़ाव होना आवश्यक है। हर पीढ़ी में समयानुसार रहन-सहन, खान-पान, भाषा, विनय, शिष्टाचार, व्यवहार में बदलाव आता रहा है और आता रहेगा, पर इस विशाल कार्यशाला में यह समझने का प्रयास करें कि सब कुछ में बदलाव आता रहा है और आता रहेगा पर मन के जुड़ाव में बदलाव न आये। पिता-पुत्र, माँ-बाप, बेटा-पोता, दादा-बेटा सब एक दूसरे की भावनाएं एवं चिंतन को समझने का प्रयास करें। जुड़ाव न होने के कई कारण हो सकते हैं। किसी के मन में अत्यधिक इच्छाएं हों, मन में वहम हो, हमदर्दी की कमी हो अथवा सहनशक्ति कम होती है तो एक दूसरे से मन का जुड़ाव हो नहीं सकता। साध्वी श्री जी ने आगे कहा — परस्परता के लिए आवश्यक है कि अपना दृष्टिकोण सम्यक् रहे। एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित करते रहें। पिता अपने पुत्र को अथवा सास अपनी बहु के प्रति आत्मीयता एवं अपनत्व के भाव रखें। पुत्र, पोता अथवा बहु ये भी स्वयं के लिए सम्माननीय पिता, दादा एवं सास के अनुभवों को सुनें। पास में बैठकर बुजुर्गों के प्रति हमदर्दी एवं आत्मीयता से दिल को जोड़ें। कार्यशाला में मुख्य रूप से आमंत्रित चेन्नई से समागत प्रवक्ता अनिता चौपड़ा एवं बबीता चौपड़ा ने अपने दोनों महत्वपूर्ण सत्र में कहा — हर पीढ़ी के साथ अगर मन का जुड़ाव होता है तो वहाँ सौहार्द, अपनत्व एवं सामंजस्य का प्रभुत्व रहता है। जहाँ एक दूसरे सदस्य के प्रति जुड़ाव रहता है तो वहाँ चार-चार पीढ़ियां भी साथ में प्रेमपूर्ण व्यवहार के साथ रह जाती हैं। चाहे आपकी पढ़ाई किसी भी शहर में चलती हो, आप कहीं भी किसी की ऑफिस में कार्यरत हों और व्यवसाय आपका देश-विदेश कहीं भी हो, पर परिवार से रिश्ता जोड़कर रखें। हर पीढ़ी से मिलजुलकर रहें। साध्वी प्रेरणाश्री जी, साध्वी मृदुयशा जी एवं साध्वी ऋद्धियशा जी ने दोनों वक्ताओं को अधिकाधिक विकास करने की एवं धर्मसंघ की गरिमा को बढ़ाने की प्रेरणा दी। आभार ज्ञापन आशीष श्रीश्रीमाल ने किया। कार्यक्रम का संचालन विनोद कोठारी ने किया।