गुरु प्रकाशपुंज है

रचनाएं

मोहन भन्साली

गुरु प्रकाशपुंज है

गुरु दीप बनकर, हमें दीप से दीप जलाना सिखाता है।।
गुरु संस्कारक बनकर, हमें आदर्श जीवन जीना सिखाता है।।
गुरु आधार बनकर, हमें मुश्किलों से लड़ना सिखाता है।।
गुरु युगपुरुष बनकर, हमें शीर्ष ऊंचाईयों पर चढ़ना सिखाता है।।
गुरु मंत्रदाता बनकर, हमें संकल्प सिद्धी का आलोक दिखाता है।।
गुरु नाविक बनकर, हमें जीवन की नैया पार कराना सिखाता है।।
गुरु चित्रकार बनकर, हमें हमारे कौरे कागज में रंग भरना सिखाता है।।
गुरु कल्पनाकार बनकर, हमें हमारे सपने को साकार करना सिखाता है।।
गुरु बागवान बनकर, हमें हमारी बगिया को रंगीन बनाना सिखाता है।।