युवराजा पाया है गण ने, पल-पल मंगल गाउं

रचनाएं

साध्वी चारूलता

युवराजा पाया है गण ने, पल-पल मंगल गाउं

वंदन इन पावन चरणों में, नित-नित शीश झुकाएं,
युवराजा पाया है गण ने, पल-पल मंगल गाउं
मलाणी पावन धरती का फूल संघ ने पाया,
महावीर ने संयम सौरभ से, शासन महाकाया,
गुरुवर ने श्रीमुख फरमाया, निश्चििंतता अब पाएं।
श्रद्धा सेवा विनम्रता से, सबके मन को जीता,
मंत्र मुग्ध हो जाते श्रोता, फिर भी घट है रीता,
संघ समर्पित, सेवा अर्पित, महर नजर में पाउं।।
महाप्रज्ञ के चरण शरण में, ज्ञान दीप जलाया,
गुरूवर की सेवा में तत्पर, महाश्रमण शीतल छाया,
जनम-जनम की पुण्याई फली है, धन्य-धन्य हो पाउं।।
लय – मैली चादर...