रचनाएं
संघ में आज खुशाली है- आज खुशाली है
संघ में आज खुशाली है2- आज खुशाली है
झूमती गणवन डाली है- संघ में...
किस्मत जागी महाश्रमण भिक्षुगण माली है
संघ में आज खुशाली है2- ।।ऑ।।
चांद कोई नया उगा है, हमारा भाग्य जगा है।
तिलक का उत्सव प्यारा, विश्व नयनों ने निहारा।
मनाते सुरगण मिलकर, घोष नंदी का सुनकर।
वीर-गोयम सी सभा है, नवेली जै.वि. भा. है।
हो हो हो..... भिक्षु के पट की यह परंपरा गौरव शाली है।
संघ में आज खुशाली है।।1।।
तर्ज: होली आई है हां क् आनंद बरसें है-
क् आनंद बरसें है-
गण नंदनवन रा फुलड़ा सरसें है- क् आनंद।
सर्वोतम कर शिष्य चयन, गणराजा चादर ओढ़ावै2
बैठो-बैठो पाटे कर मनुहार बिठावै है क् आनंद।।1।।
महाप्रतापी-महाश्रमण गुरू, अद्भुत रचना दिखलाई2
वर्धापन पर लाख बधाई, रूं रूं विकसै है क्...।।2।।
जय जय नंदा, जय जय भद्दा, संघ चतुष्टय रो स्वर है2
गुरू री महामहिमा सुण दिल रा शतदल हर सै है
क् आनंद बरसें है
तर्ज – आज मेरे यार की शादी है