मैं अपने आप को भाग्यशाली मानती हूं

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साध्वी संभवश्री

मैं अपने आप को भाग्यशाली मानती हूं

मैं अपने आप को भाग्यशाली मानती हूं। मुझे राज में रहने का आचार्य प्रवर कि सेवा का अवसर प्राप्त होता है और यहां पर रहने के कारण इन आंखों ने अनेक दृश्य निहारे।
1. मुझे याद है। 2010 का वह अवसर मुझे आचार्य महाप्रज्ञ कि अन्तिम सेवा का अवसर मिला उस दिन शाम कि लास्ट गोचरी जाने का अवसर प्राप्त हुआ इन आंखों ने वह भी दृश्य देखा जब आचार्य महाश्रमणजी ने आचार्य पद ग्रहण किया।
2. मुझे याद है 2016 का वह सुनहरा अवसर उस समय न साध्वी प्रमुखाश्रीजी वहां पर थे न मुख्य नियोजिका जी वहां पर थे। राज में रहने वाली कही सतियां भी वहां पर उपस्थित नहीं थी इन आँखों ने उस दृश्य को निहारा जब आचार्य प्रवर ने साध्वीवर्या व मुख्यमुनि पद का सर्जन किया।
3. मैं याद करती हूं 2022 का अवसर उस समय आचार्य प्रवर ने साध्वी प्रमुखाश्रीजी को शासनमाता अलंकार से अलंकृत किया उसके बाद मराज दिल्ली दिखाने पधारे तो आचार्य प्रवर मुझे भी दिल्ली साथ लेके पधारे अगर में नहीं जाती तो मराज कि अन्तिम सेवा में नहीं कर पाती अन्तिम दर्शन भी नहीं कर पाती, मन में धोका हो जाता इस समय भी भाग्य ने साथ दिया।
4. मैं याद करती हूं 2022 को उसी 2022 में आचार्य प्रवर को युगप्रधान पद दिया गया वह साध्वी नियोजिकाजी विश्रुतविभाजी को साध्वी प्रमुखा बनाया गया यह दृश्य सरदारशहर का इस सीन को भी मेरी इन नयनों ने निहारा।
5. मैं याद करती हूं! भिक्षु जन्मोत्सव के लास्ट चरण को स्वामीजी कि 13 को उस दिन तो अचानक से ही आचार्य प्रवर ने मुख्यमुनि प्रवर को युवाचार्य पद प्रदान करवाया सभी देखते ही रह गए योगक्षेम के इस अवसर पर साधु-साध्वियों कि अच्छी उपस्थिती थी सभी को यह अवसर देखने को मिला, मुझे सबसे ज्यादा खुशी थी युवाचार्य प्रवर हमारे साथ दीक्षा ली वह उनकी दीक्षा भी जसोल में हुयी थी 18 दीक्षा में एक युवाचार्य प्रवर व दूसरे में साध्वीवर्याजी उनकी समणी दीक्षा हमारे साथ हुयी और मेरी दीक्षा भी जसोल में हुयी वह में जसोल कि हूं और उस दिन 13 भी बड़ी थी आचार्य प्रवर ने भिक्षु कि गद्दी पै दूसरे भिक्षु को बिठा दिया पूरा संघ जय-जय नन्दा, जय-जय नन्दा वाला गीत गाने लगा।
यह नयन भाग्यशाली हैं जिनको यह दृश्य देखने को मिले व्यक्ति के कही² पर भाग्य अच्छे होते हैं उनको यह दृश्य देखने को मिलते हैं। भाग्य साथ देता है तभी गुरु सन्निधी प्राप्त होती हैं।
भाग्य अच्छे होते हैं तभी आचार्य प्रवर अपने साथ रखते हैं। भाग्य अच्छे होते हैं तभी तेरापंथ धर्मसंघ में दीक्षित होते हैं। यह सुनहरे पल भाग्य से हि देखने को मिलते हैं।