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नवयुग के नव-अरुण : युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी
1.धर्मसंघ की परंपरा और ऐतिहासिक मनोनयन : तेरापंथ धर्मसंघ की ढाई सौ वर्षों से अधिक की यात्रा में हर युग ने अपनी मर्यादा और अनुशासन को आगे बढ़ाने वाला नेतृत्व पाया है। इसी शृंखला में 27 जुलाई 2026 की प्रातः लाडनूँ में आयोजित कार्यक्रम में पूज्यप्रवर आचार्यश्री महाश्रमणजी ने जैसे ही 'आओ मुनि महावीर' कहा, पूरा वातावरण उल्लास से भर उठा। सैकड़ों साधु-साध्वियों और हजारों श्रावकों की उपस्थिति में मुख्य मुनि श्री महावीरकुमारजी को धर्मसंघ के युवाचार्य पद पर मनोनीत किया गया। यह निर्णय कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक आचार्यश्री के सान्निध्य में रहकर निष्ठा, समर्पण और गुरु-आज्ञा-पालन की साधना का स्वाभाविक फल था।
2. व्यक्तित्व और युगीन आवश्यकता : युवाचार्यश्री का जीवन एक साधक के आदर्श स्वरूप का प्रतिबिंब है। वे एक ओर गंभीर शास्त्रीय चिंतन में निमग्न रहते हैं, तो दूसरी ओर सामान्य श्रावक-श्राविकाओं के बीच उतने ही सहज और सरल रहते हैं। मुनि महावीर से मुख्यमुनि और फिर युवाचार्य पद तक की उनकी यात्रा अनुकरणीय विनयशीलता और गुरुभक्ति का प्रतिफल है।
आज के बदलते दौर और क्षरण होते मूल्यों के बीच धर्मसंघ को ऐसे ही संतुलित, संयमी, सौम्य और श्रुतनिष्ठ नेतृत्व की आवश्यकता थी, जो प्राचीन परंपराओं की रक्षा करते हुए नई युगीन चुनौतियों का सामना कर सके।
3. दूरदर्शिता और अभियानों की निरंतरता : धर्मसंघ का नेतृत्व केवल पदवी का हस्तांतरण नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा का प्रवाह है। आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने तेजस्वी नेतृत्व से नशामुक्ति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव के जिन अभियानों को गति दी है, अब युवाचार्यश्री के माध्यम से उन्हें भविष्य की पीढ़ियों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। यही दूरदर्शिता तेरापंथ धर्मसंघ के स्थायित्व का मुख्य आधार रही है।
4.व्यक्तिगत संस्मरण और वर्धापना (लेखक के अनुभव): सूरत चातुर्मास, भुज मर्यादामहोत्सव, गाँधीधाम, अहमदाबाद तथा लाडनूँ प्रवास के दौरान युवाचार्य प्रवर का निरंतर स्नेहमयी आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। सूरत चातुर्मास में सघन साधना शिविर के प्रचार-प्रसार हेतु 'जैन तेरापंथ न्यूज' (JTN) को विशेष मार्गदर्शन मिला। हजारों घरों का स्वयं पधारकर स्पर्श करना और श्रावकों की सार-संभाल करना उनके जन-सुलभ व्यक्तित्व को दर्शाता है। संपूर्ण JTN परिवार की ओर से उनके चरणों में अनंत श्रद्धा-सुमन अर्पित हैं और यही मंगलकामना है कि उनके नेतृत्व में ज्ञान-दीप की यह ज्योति सदियों तक प्रकाशमान रहे।