युग-परंपरा का पावन संवाहक: युवाचार्य श्री महावीरकुमारजी

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मुकेश भटेवरा (पूर्व कार्यकारी संपादक, JTN) l (2020-2021)

युग-परंपरा का पावन संवाहक: युवाचार्य श्री महावीरकुमारजी

1. ऐतिहासिक मनोनयन और पावन प्रसंग : तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय उस दिन लिखा गया, जब युग प्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने लाडनूं की पावन धरा पर मुख्य मुनि श्री महावीरकुमारजी को धर्मसंघ के युवाचार्य पद पर मनोनीत किया। यह घोषणा केवल एक पद की नियुक्ति नहीं, बल्कि आचार्य भिक्षु द्वारा प्रवर्तित उस दिव्य परंपरा की निरंतरता थी, जो अनुशासन, मर्यादा और आध्यात्मिक उत्कर्ष के आधार पर सैकड़ों वर्षों से अक्षुण्ण चली आ रही है। यह अवसर संयोगवश आचार्य भिक्षु के बोधि दिवस के पावन प्रसंग पर आया, जिसने इस निर्णय को और भी अधिक मंगलमय और प्रतीकात्मक बना दिया।
2. व्यक्तित्व, क्षमता और गुरु-दूरदर्शिता : युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी का व्यक्तित्व सरलता, विनम्रता और आत्मीयता का अनूठा संगम है। उनकी वाणी में मधुरता, आचरण में संयम और चिंतन में गहराई है, जो उन्हें आचार्यश्री महाश्रमणजी का अत्यंत विश्वस्त और स्नेहभाजन शिष्य बनाती है। धर्मसंघ की बहुश्रुत परिषद के संयोजक के रूप में उन्होंने अपनी संगठनात्मक क्षमता और श्रुत-साधना का उत्कृष्ट परिचय दिया। आचार्य तुलसी के विवेक, श्रमशीलता और श्रुताराधना जैसे महान गुण उनमें समाहित हैं। अतीत में स्वयं आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने युवाचार्य पद पर रहते हुए आचार्य महाश्रमणजी को मुनि महावीरजी को सदैव अपने साथ रखने का निर्देश दिया था, जिसकी दूरदर्शिता आज साकार रूप ले चुकी है।
3. जन-मानस का उल्लास और देश-विदेश में अभ्यर्थना : जिस क्षण लाडनूं में युवाचार्य पद की घोषणा हुई, संपूर्ण परिसर 'जय-जय ज्योतिचरण, जय महाश्रमण' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आँखों में हर्ष के आँसू थे और हृदय कृतज्ञता से भरे हुए थे। यह दृश्य केवल लाडनूं तक सीमित न रहकर देश-विदेश के अनेक नगरों तक पहुँचा, जहाँ तेरापंथ समाज ने हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया। जगह-जगह अभ्यर्थना और वर्धापना समारोह आयोजित हुए, जिनमें श्रावक-श्राविकाओं ने नवमनोनीत युवाचार्यश्री के चरणों में अपनी अनन्य भक्ति समर्पित की।
4. धर्मसंघ का स्वर्णिम युग और मंगलकामना : नैतिकता, नशामुक्ति, सद्भावना और मानवता के संदेशवाहक आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने इस निर्णय से धर्मसंघ के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता पुनः प्रमाणित की है। नैतिक मूल्यों के क्षरण और भटकाव के इस दौर में युवाचार्यश्री जैसे सरल, संयमी और श्रुतनिष्ठ संत का नेतृत्व संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रकाश स्तंभ सिद्ध होगा। उनकी शांत तेजस्विता, सहज वात्सल्य और अडिग गुरुभक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। इस पावन अवसर पर उनके चरणों में हार्दिक अभ्यर्थना है कि उनके नेतृत्व में धर्मसंघ प्रगति के नए सोपान तय करे और आचार्य भिक्षु की ज्ञान-ज्योति सदियों तक दीप्तिमान रहे।