संस्थाएं
कालू परम कृपालू, चांद-चंदन सा शीतल स्वभाव
मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में गुरुवार को मुनि तत्त्व रुचि जी 'तरुण' एवं मुनि संभव कुमार जी संत मुनिराज के सान्निध्य में तेरापंथ जैन संघ के महाप्रतापी अष्टम आचार्यश्री कालूराम जी महाराज की 91वीं पुण्यतिथि का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मुनि तत्त्व रुचि जी 'तरुण' महाराज ने कहा - संत का पंथ सरलता है। उसमें ऋजुता, मृदुता, सहिष्णुता, अनाकांक्षी, निरभिमानी, निरतिचारी, क्षमाशील, समताशील, सहजता, विनम्रता आदि गुण होते है। वह संत अपनी आत्मा के निकट रहता है और आत्मा में रमण करता है। मुनिश्री जी, आचार्य श्री कालू की पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा - आचार्य श्री कालू परम कृपालू और परम दयालू पुरुष थे। उनका स्वभाव चांद और चन्दन सा शीतल, उनका जीवन सूरज सा उजला और चमकीला था। उनका नेतृत्व न्याय-नीति पर आधारित था।
उन्होंने अपने शासन काल में दीक्षा, शिक्षा, साधना, सेवा और संघ विस्तार के नये कीर्तिमान स्थापित किये। उनकी कष्ट सहिष्णुता और निस्पृहता बेजोड़ थी। मुनिश्री संभव कुमार जी महाराज ने कहा - आचार्य कालू एक करुणाशील महापुरुष थे। उनकी आभा में तेज था। उनकी वाणी में ओज था। उनके व्यवहार में जादुई प्रभाव था। वे सदाचारी और नीति-निपुण व्यक्ति थे। उनकी दृष्टि युगानुकूल थी। वे युगद्रष्टा ही नहीं युग स्रष्टा भी थे। उन्होंने जैन शासन और मानवता की जो सेवा की वह उल्लेखनीय है। उनका जीवन साधुत्व का आदर्श है। व्यक्तित्त्व निर्माण के वे शिल्पकार थे। आचार्य श्री तुलसी और आचार्य श्री महाप्रज्ञ जैसे विश्व विख्यात व्यक्तित्त्व उनके शिष्य थे। ऐसे युग पुरुष का युग सदा आभारी रहेगा। कार्यक्रम की शुरुआत में तीर्थंकर शांति नाथ भगवान की स्तुति की गयी। मौके पर तपस्विनी बहिन मोनिका अनुमोदना की।