अभातेयुप और तेयुप तेरापंथ धर्म संघ की सेना है :आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 26 सितम्बर, 2026

अभातेयुप और तेयुप तेरापंथ धर्म संघ की सेना है :आचार्यश्री महाश्रमण

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की
पावन सन्निधि में जैन विश्व भारती, लाडनूं स्थित सुधर्मा सभा परिसर में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) के 60वें राष्ट्रीय अधिवेशन 'संवर्धनम' का भव्य एवं गरिमामय मंचीय शुभारंभ हुआ।
अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में पूज्य प्रवर आचार्यश्री महाश्रमण जी, युवाचार्यश्री महावीर कुमार जी, साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी एवं साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी की दिव्य उपस्थिति एवं पावन पाथेय से समूचा परिसर अध्यात्म और युवा ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा।
युवाशक्ति की सहभागिता–
योगक्षेम वर्ष के अंतर्गत आयोजित इस त्रिदिवसीय अधिवेशन में देशभर की 210 शाखा परिषदों से 1000 से अधिक प्रतिनिधियों एवं अभातेयुप साथियों ने सहभागिता की। आध्यात्मिक प्रेरणा, संगठनात्मक चिंतन, प्रशिक्षण, संवाद, सेवा, सम्मान एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से परिपूर्ण इस अधिवेशन में अभातेयुप की छह दशकों की यात्रा को नई दिशा देने का प्रयास किया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष व्यक्तव्य –
राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मांडोत ने अपने वक्तव्य में कहा कि पिछले अधिवेशन में जब उन्हें पूज्यप्रवर की कृपादृष्टि से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का अवसर मिला, तब उनकी टीम ने कुछ विज़न तय किए और कुछ संकल्प लिए थे। मुनि योगेशकुमारजी एवं मुनि नयकुमारजी की प्रेरणा से आज उनमें से अनेक संकल्पों पर कार्य चल रहा है। पवन मांडोत ने अभातेयुप द्वारा पहली बार आयोजित 54 दिवसीय अखंड जप, CPS, किशोर दिवस, संस्कार केंद्र, रक्तदान कर्तव्यम्, युवा लोक एवं अभातेयुप इतिहास सहित अनेक आयामों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने युवाशक्ति के साथ उद्घोष किया— “सतयुग की नजीर—महाश्रमण महावीर!”
नव मनोनीत पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण–
संविधान संशोधन की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मांडोत ने नवमनोनीत उपाध्यक्ष संदीप हिंगड़ एवं कमलेश भंसाली, सह-संगठन मंत्री विनय लिंगा एवं महेश परमार तथा सह-कोषाध्यक्ष सिद्धार्थ चोरड़िया के नामों की घोषणा की। पूज्यप्रवर के मंगल पाठ के साथ उन्हें शपथ ग्रहण करवाई गई।
महामंत्री सौरभ पटावरी ने अपना मंत्री प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। 

'समाज की सुरक्षा पंक्ति में खड़ी युवा सेना'....

पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी ने अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) के 60वें राष्ट्रीय अधिवेशन 'संवर्धनम' के पावन अवसर पर कार्यकर्ताओं के आंतरिक गुणों, परिषद के उत्तरदायित्व और भावी पीढ़ी के निर्माण पर अत्यंत ओजस्वी एवं प्रेरणादायक पाथेय प्रदान किया।
तीन श्रेणियों के मनुष्य और 'उत्तम कार्यकर्ता' का गुण:
पूज्य प्रवर ने फरमाया कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए कार्यकर्ता में उत्साह और साहस का होना अनिवार्य है। पूज्य श्री ने कार्य करने की प्रवृत्ति के आधार पर व्यक्तियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया:
१. निम्न श्रेणी : ऐसे व्यक्ति जो विघ्नों और बाधाओं के भय से कार्य प्रारंभ ही नहीं करते।
२. मध्यम श्रेणी : जो शुरुआत में उत्साह के साथ कार्य शुरू तो कर देते हैं, किंतु पहली बाधा आते ही बीच में छोड़ देते हैं।
३. उत्तम श्रेणी : जो हर कठिनाई, चुनौती और विघ्न का सामना करते हुए भी अपने कार्य को पूर्ण निष्ठा और संकल्प के साथ अंतिम मुकाम तक पहुँचाते हैं।
अभातेयुप: 'तेरापंथ समाज की अनुशासित सेना:'
१. 60वाँ अधिवेशन - स्थिरता का प्रतीक : पूज्य आचार्य श्री ने परिषद के 60वें अधिवेशन को संगठन के 'स्थिरत्व' और परिपक्वता का प्रतीक बताया।
२. सेवा, सुरक्षा और व्यवस्था : अभातेयुप के अवदान की भूरि-भूरि सराहना करते हुए पूज्य प्रवर ने परिषद को 'तेरापंथ समाज की सेना'
की संज्ञा दी, जो हर विपरीत परिस्थिति में अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर सेवा, सुरक्षा और व्यवस्था का दायित्व निष्ठापूर्वक निभाती है।
नई पीढ़ी में संस्कारों का सिंचन :
१. किशोरों का निर्माण: पूज्य प्रवर ने अभातेयुप द्वारा चलाए जा रहे किशोर निर्माण और संस्कार कार्यक्रमों की विशेष प्रशंसा की।
२. तप और त्याग का मार्ग : युवाओं और किशोरों को धार्मिक संस्कार, संयम, तपस्या और त्याग के मार्ग पर अग्रसर करना समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
सार संदेश : कठिनाइयों के समक्ष न झुककर निष्ठापूर्वक कार्य पूरा करना ही उत्तम कार्यकर्ता की पहचान है; सेवा, सुरक्षा और संस्कारों का यह त्रिवेणी संगम ही अभातेयुप को समाज का वास्तविक रक्षक बनाता है।

'कटी हुई पतंग सा हो जाता है जीवन...'
( युवाचार्य प्रवर ने युवाओं को बताया आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संतुलन!)

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अधिवेशन में पूज्य युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी ने युवाओं के वर्गीकरण, आधुनिकता की अंधी दौड़ और जीवन में आध्यात्मिकता के समन्वय पर अत्यंत मर्मस्पर्शी एवं व्यावहारिक पाथेय प्रदान किया।
युवा शक्ति का वर्गीकरण: युवाओं के 5 प्रकार:
पूज्य युवाचार्य प्रवर ने युवाओं की मानसिकता और ऊर्जा के आधार पर उन्हें 5 श्रेणियों में रेखांकित किया।
१. असक्त युवा : जो केवल शारीरिक रूप से युवा हैं, किंतु मानसिक रूप से निराशा और हताशा से घिरे हैं।
२. सशक्त युवा : जो तन और मन दोनों से ऊर्जावान हैं तथा सदैव सकारात्मक कार्यों के लिए तत्पर रहते हैं।
३. आसक्त युवा : जो अपनी अमूल्य युवा-ऊर्जा को व्यसनों, कुप्रवृत्तियों और गलत दिशा में नष्ट कर देते हैं।
४. विरक्त युवा : जो सांसारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी निश्चय-व्यवहार के समन्वय से जीवन को अध्यात्म के अनुकूल ढालते हैं।
५. भक्त युवा : जो शक्ति के साथ-साथ अटूट भक्ति रखते हैं और देव-गुरु-धर्म के प्रति पूर्ण समर्पित रहकर आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूते हैं।
'कटी पतंग' का दृष्टांत: आधुनिकता बनाम आध्यात्मिकता:
१. मूल जड़ों से न कटें : पूज्य श्री ने चेताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में मूल संस्कारों से कटना जीवन को कटी हुई पतंग जैसा बना देता है—जैसे डोर टूटने पर पतंग दिशाहीन होकर गिर जाती है, वैसे ही अध्यात्म से कटकर युवा पथभ्रष्ट हो जाता है।
२. गति और विवेक का संतुलन : पूज्य प्रवर ने फरमाया कि आधुनिकता हमें 'गति' और सुविधाएं दे सकती है, परंतु शांति, विवेक और जीवन को वास्तविक ऊंचाई केवल आध्यात्मिकता ही प्रदान करती है।
'रथ' के दो पहिए और असीमित अवसर :
१. जीवन का दो-पहिया रथ : युवाचार्य प्रवर ने जीवन की तुलना एक रथ से की, जिसके दो पहिए—'आधुनिकता' और 'आध्यात्मिकता' हैं। इन दोनों के सम्यक् समन्वय से चलने वाला युवा ही समाज के लिए एक मिसाल बनता है।
२. सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान : उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज तकनीक और संसाधनों के बल पर दुनिया आपकी मुट्ठी में है, अतः अपनी असीम क्षमताओं का उपयोग संघ और समाज के उत्थान में करें।
सार संदेश: आधुनिकता की गति को यदि आध्यात्मिकता की दिशा मिल जाए, तो युवा शक्ति जीवन के रथ को सफलता और संस्कारों के उच्चतम शिखर तक ले जा सकती है।

'मानो तेयुप अब तेरापंथ हो गया...'
('तेरापंथ टाइम्स' पर बरसी पूज्य प्रवर की कृपा दृष्टि)

मानव जीवन और समाज के संगठन में सूचना का कितना महत्व है? पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी ने अपने पावन उद्बोधन में 'तेरापंथ टाइम्स' की उपयोगिता, इसके ऐतिहासिक सफर और समाज को जोड़ने में इसकी प्रभावी भूमिका पर विस्तार से पाथेय प्रदान किया।
सूचना का सशक्त माध्यम और वास्तविक समाचार पत्र:
१. समाज का सशक्त दर्पण : पूज्य प्रवर ने वर्षों से निरंतर प्रकाशित हो रही इस पत्रिका की भूरि-भूरि सराहना करते हुए फरमाया—
'तेरापंथ समाज में समाचार पत्र का रूप देखने को मिलता है, तो वह 'तेरापंथ टाइम्स' में मिलता है।'
२. जन-जन तक समाचार : पूज्यश्री ने रेखांकित किया कि समाज की विविध गतिविधियों, गुरुकुल वास, धार्मिक अनुष्ठानों तथा संघ की महत्वपूर्ण जानकारियों को धर्मप्रेमी तक पहुँचाने में यह पत्र अत्यंत सशक्त और प्रभावी भूमिका निभा रहा है।
'तेयुप समाचार' से 'तेरापंथ टाइम्स' तक का गौरवशाली सफर:
१. नामकरण का इतिहास : आचार्य प्रवर ने पत्र के नामकरण के विकास पर प्रकाश डालते हुए फरमाया कि पूर्व में इसका नाम 'तेयुप समाचार' (या इसी प्रकार का) था, जिसे कालान्तर में विस्तृत दृष्टि के साथ बदलकर 'तेरापंथ टाइम्स' किया गया।
२. व्यापकता का प्रतीक : इस ऐतिहासिक बदलाव पर पूज्य प्रवर ने बड़े ही सुंदर भाव व्यक्त किए— 'मानो तेयुप अब तेरापंथ हो गया।' यह नाम परिवर्तन केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि पूरे तेरापंथ समाज के साथ इसके आत्मिक और व्यापक जुड़ाव का प्रतीक है।
संपादकीय संदेश : 'तेरापंथ टाइम्स' केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि आचार्य प्रवर के आशीर्वाद से सिंचित, पूरे तेरापंथ धर्म संघ को एक सूत्र में पिरोने वाला एक प्रामाणिक और गौरवशाली स्तंभ है।

'हथौड़ा, कील और बालू...'
(साध्वीप्रमुखा जी ने एक अनोखे प्रसंग से खोला सफलता का 'त्रिकोण'!)

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन सम्मुख साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने एक व्यावहारिक दृष्टांत के माध्यम से सफलता के अनिवार्य घटकों, सही दृष्टिकोण और युवा शक्ति की चार मुख्य श्रेणियों पर अत्यंत मर्मस्पर्शी व प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए।
सफलता का व्यावहारिक दृष्टांत : हथौड़ा और कील की कहानी:
एक व्यक्ति यह जानने निकला कि किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए मुख्य रूप से किन चीज़ों की आवश्यकता होती है। उसने एक हथौड़ा और कील ली और लोगों के पास गया।
१. ऊर्जा (Energy) की कमी : वृद्ध व्यक्ति ने कहा कि उसमें अब कील ठोकने की ताकत या ऊर्जा ही नहीं है।
२. प्रतिभा (Talent) का अभाव: पहलवान में ताकत तो थी, लेकिन उसने कील को 'रेत' (बालू) में ठोकने का प्रयास किया, जहाँ सही दिशा और टैलेंट का अभाव दिखा।
३. समय (Time) की जल्दबाजी : तीसरे व्यक्ति ने बिना सोचे समझे जल्दबाजी में कार्य किया। सीख: साध्वी जी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए ऊर्जा (Energy), सही प्रतिभा (Talent) और उपयुक्त समय (Time)—इन तीनों का सही नियोजन व संतुलन होना बेहद आवश्यक है।
संघ-सेवा में युवाओं की 4 श्रेणियाँ:
साध्वी प्रमुखा जी ने धर्म संघ और समाज के संदर्भ में युवाओं को 4 श्रेणियों में रेखांकित किया।
१. आराधक युवक : जो मुख्य रूप से अपनी आत्मिक उन्नति, स्वाध्याय, सामायिक, ध्यान और धार्मिक साधना में लीन रहते हैं।
२. कार्यकर्ता युवक : जो अपनी आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ संघ और समाज के व्यवस्थात्मक कार्यों में सक्रिय योगदान देते हैं।
३. प्रभावक युवक : जो अपने उत्कृष्ट व्यवहार, व्यक्तित्व और आचार से दूसरों को प्रभावित कर संघ के प्रति आकर्षण जगाते हैं।
४. विकासयोगी युवक : जो निरंतर स्वयं के संवर्धन और संस्था की प्रगति के लिए नए-नए नवाचार (Innovations) और प्रयोग करते रहते हैं।
सार संदेश : सही समय पर ऊर्जा और प्रतिभा का संयोजन ही सफलता दिलाता है; युवा यदि आराधक, कार्यकर्ता, प्रभावक और विकासयोगी बनकर कार्य करें तो संघ-प्रभावना को नए शिखर मिल सकते हैं।

डांस-प्लेइंग तो ठीक, पर अध्यात्म बिना क्या करेंगे बच्चे?'...
(साध्वीप्रमुखा जी ने अभिभावकों और युवाओं को दिया 'संस्कार-संकल्प'!)

साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने युवाओं के मानवीय गुणों, संघ के प्रति उनके दायित्वों तथा अभिभावकों द्वारा बच्चों में दिए जाने वाले संस्कारों पर अत्यंत ओजस्वी, संक्षिप्त और मर्मस्पर्शी मार्गदर्शन प्रदान किया।
आदर्श युवा के गुण और संघ के प्रति दायित्व:
१. स्वस्थ विचार और मानवीय गुण : साध्वीप्रमुखा जी ने स्पष्ट कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ 'विचारों की स्वस्थता' युवा की असली पहचान है। आदर्श युवा वही है जिसके कार्यों में करुणा, स्वभाव में मैत्रिभाव, और जो शिक्षित, संस्कारी, सेवाभावी व स्वावलंबी हो।
२. संघ ही आधार और भविष्य : संघ ही जीवन का मूल आश्रय है। युवाओं का सबसे बड़ा दायित्व यह चिंतन करना है कि वे संघ के भविष्य को कैसे सुरक्षित और उज्ज्वल बना सकते हैं।
अभिभावकों का दायित्व और 'ज्ञानशाला' से जुड़ाव:
१. अध्यात्म के बिना अधूरा विकास: साध्वीप्रमुखा जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज अभिभावक बच्चों को डांस, खेल और अन्य गतिविधियों में तो व्यस्त रखते हैं, किंतु यदि उनमें आध्यात्मिकता और संस्कार नहीं होंगे, तो वे बड़े होकर सही दिशा कैसे पाएंगे?
२. ज्ञानशाला से जोड़ें : उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें प्रारंभ से ही 'ज्ञानशाला' (धार्मिक शिक्षा केंद्र) से अवश्य जोड़ें।
युवाओं से विशेष संकल्प ('2 नए सदस्य'):
१. संघ-सुरक्षा और कनेक्टिविटी: साध्वीप्रमुखा जी ने युवाओं से संघ की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विशेष संकल्प लेने की पावन प्रेरणा दी कि प्रत्येक युवक वर्ष में कम से कम 2 ऐसे नए युवकों को युवक परिषद से जोड़े, जो अभी तक साधु-साध्वियों या संघ के संपर्क में नहीं आए हैं।
२. सार संदेश : विचारों की स्वस्थता से युवा संघ का आधार बनते हैं, और बचपन में ज्ञानशाला व अध्यात्म के मिले संस्कार ही समाज और संघ के भविष्य को सुरक्षित करते हैं।

'1 डॉलर की पुरानी टी-शर्ट और $1200 में बिक्री...'

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) के राष्ट्रीय अधिवेशन में साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी ने युवाओं में कार्यकुशलता
(Efficiency) चिंतनशीलता और जीवन-मूल्यों के विकास पर एक अत्यंत प्रेरक और व्यावहारिक प्रसंग साझा किया।
माइकल जॉर्डन के बचपन का प्रेरक प्रसंग:
न्यूयॉर्क्स के एक पिता ने अपने 12-13 वर्ष के बेटे को संस्कार और व्यावहारिक शिक्षा देने के लिए पुरानी टी-शर्ट बेचने का प्रयोग किया।
१. पहला प्रयास ($1 से $2) : पिता की आज्ञा मानकर बच्चे ने पुरानी टी-शर्ट धोई, प्रेस की और अपनी मेहनत व मासूमियत के बल पर रेलवे स्टेशन पर उसे $2 में बेच दिया।
२. दूसरा प्रयास ($20) : पिता ने वही टी-शर्ट $20 में बेचने को कहा। बच्चे ने नवाचार (Innovation) करते हुए अपने दोस्त से उस पर 'मिकी माउस' पेंट करवाया। एक स्कूल के बाहर एक बच्चे की जिद पर उसकी माँ ने इसे $25 में खरीदा।
३. तीसरा प्रयास ($1200) : इस बार बच्चे ने योजनाबद्ध तरीके से अवसर (Opportunity) का लाभ उठाया। उसने शहर में आई एक मशहूर हस्ती का ऑटोग्राफ उस टी-शर्ट पर लिया। भीड़ में बोली लगी और टी-शर्ट रिकॉर्ड $1200 में बिकी!
पिता ने बेटे को गले लगाते हुए कहा 'बेटा, आज तुमने न केवल सामान बेचा है ।
बल्कि जीवन का संघर्ष, मार्केटिंग और सही समय पर अवसरों का लाभ उठाना सीख लिया है। याद रखना, जीवन में 'जहाँ चाह, वहाँ राह' होती है।' वही बालक आगे चलकर दुनिया का महान बास्केटबॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन बना।
अभातेयुप और युवा शक्ति का निखार:
साध्वीश्री जी ने इस दृष्टांत को तेरापंथ युवक परिषद से जोड़ते हुए कहा।
१. वैल्यू और चिंतन शक्ति : जिस प्रकार उस बालक ने अपनी सोच से टी-शर्ट की वैल्यू बढ़ाई, ठीक उसी प्रकार अभातेयुप ने भी अपनी स्थापना से
लेकर आज तक युवाओं की चिंतनशील शक्ति और संगठन की वैल्यू को निरंतर बढ़ाया है।
२. गुरु-कृपा का बल : युवाओं की इस ऊर्जा और क्षमता को दिशा व 'फोर्स' देने का ऐतिहासिक कार्य युगप्रधान आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ जी एवं वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी ने निरंतर किया है।
सार संदेश : सही चिंतन, दृढ़ संकल्प और अवसरों के सम्यक् उपयोग से हर कठिन मार्ग आसान हो जाता है; क्योंकि निष्ठा से प्रयास करने वालों के लिए 'जहाँ चाह, वहाँ राह' स्वतः बन जाती है।