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224वें चरमोत्सव पर धम्म जागरणा समारोह
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी राकेश कुमारी जी आदि ठाणा–४ के सान्निध्य में विले पार्ले गोयल भवन में 224वें चरमोत्सव के उपलक्ष्य में भावपूर्ण धम्म जागरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी राकेश कुमारी जी के नवकार मंत्र उच्चारण से हुआ। सूरत से पधारीं दोनों बहनों ने पूनम बुरड़ एवं चांदन जैन ने मंगलाचरण के पश्चात अपने स्वरचित भावपूर्ण गीतों से भक्ति का वातावरण निर्मित किया। संदीप जैन, रेणु कोठारी ने भी अपनी सुमधुर गीत प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। चारों गीतकार-गायकों की प्रस्तुतियों ने भक्तिमय समां बाँधा। इस अवसर पर साध्वी राकेश कुमारी जी ने कहा कि भिक्षु स्वामी के प्रति समर्पण और श्रद्धा के भावों से हुई यह भक्ति सभी को अपने साथ लीन कर देती है। आज के जीवन में व्यक्ति अनेक प्रकार के तनाव और चिंताओं से घिरा रहता है, लेकिन जब ऐसी भक्ति में हम झूमते हैं तो मन को एक अलग ही ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है, भिक्षु स्वामी हमारे आराध्य हैं। उन्होंने कितने-कितने कष्टों सहन करके वीतराग पथ का मार्ग दिखाया शुद्ध साधन से शुद्ध साध्य की प्राप्ति का मार्ग दिखाया। भिक्षु निर्वाण के इस पावन दिवस पर हम धम्म जागरण के माध्यम से भक्ति गीतों में झूम रहे हैं। 'एक शाम भिक्षु के नाम' की यह भक्ति अपने भीतर शक्ति देने वाली, अनुरक्ति देने वाली है। ऐसे भक्ति गीतों के माध्यम से हमारे कर्मों की निर्जरा भी होती है। साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने सभी कलाकारों के प्रति मंगलकामना की। कार्यक्रम का संचालन रेखा कोठारी ने किया।