आचार्य भिक्षु की तप– साधना से सिरियारी की माटी कुन्दन बनी

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रोहिणी दिल्ली।

आचार्य भिक्षु की तप– साधना से सिरियारी की माटी कुन्दन बनी

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा रोहिणी तेरापन्थ भवन सेक्टर-5 रोहिणी में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी सुमनश्री जी के सान्निध्य में भिक्षुचरमोत्सव एवं धम्म जागरण' का कार्यक्रम उत्साह‌पूर्ण वातावरण में मनाया गया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा रोहिणी के तत्त्वाधान में आयोजित कार्यक्रम का प्रारम्भ साध्वी मधुर लता के मधुर संगान' श्रद्धा से हम करे प्रणाम' गीत से हुआ। दिल्ली तेरापंथ सभा के महामंत्री प्रदीप जी संचेती ने आचार्य भिक्षु को सिंहपुरुष तपोयोगी बताते हुए कहा भिक्षु महावीर वाणी के भाष्यकार थे। उनकी कथनी करनी में पूर्ण समानता थी। खुद सत्य मार्ग पर चले और जन जन की आध्यात्मिक चेतना जगाने का संदेश दिया।
शासनश्री साध्वी सुमन श्री जे ने प्रेरक प्रवचन के दौरान कहा कि आचार्य भिक्षु कई पिछले जन्मों की योग साधना और सत्य का बल लेकर इस धरती पर अवतरित हुए। वे आत्म दृष्टा, सत्यदृष्टा और भविष्यदृष्टा थे। उनकी तपस्या साधना से सिरियारी की माटी कुन्दन बन गई, जहां आज तेरस के दिन श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ रहा है। भिक्षु नाम ही अपने आप में चर्मत्कारी और मंत्राक्षर नाम है। अन्धेरी ओरी में तेरापंथ की स्थापना एक अपूर्व धर्म क्रान्ति थी। उनका बोया छोटा सा बीज आज पूरी मानव जाति को शीतल छांव दे रहा है, आलोक दे रहा है। साध्वी सुरेखा ने भिक्षु के जीवन दर्शन पर बोलते हुए कहा कि उनका जीवन दर्शन खुले ग्रन्थ के समान है जिनका कोई भी पृष्ठ-पंक्ति कहीं से भी पढ़े पाठक के लिए बोध पाठ है । भिक्षु दृष्टान्त का हर प्रसंग कितनी ही बार पढे उनमें इक्षु जैसा माधुर्य रस ही मिलता है। आचार्य भिक्षु अनेकान्त दृष्टि के प्रयोक्ता थे तो संघर्षों कष्टों को सहने में वज्र से भी कठोर थे। उन्नत आचार और आगमवाणी से सत्य का नवनीत जीवन भर पीते रहे बांटते रहे।