महान आत्मार्थी संत थे आचार्य भिक्षु

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दक्षिण मुंबई।

महान आत्मार्थी संत थे आचार्य भिक्षु

आचार्य महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में आचार्य भिक्षु का २२४वाँ महाप्रयाण दिवस तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम् अधिशास्ता परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी कंचनप्रभाजी, शासनश्री साध्वी मंजुरेखाजी आदि ठाणा-५ के पावन सान्निध्य में मनाया गया। शासनश्री साध्वी श्री कंचनप्रभाजी ने कहा— 'आज हम तेरापंथ प्रणेता आचार्य भिक्षु को असीम श्रद्धा के साथ याद कर रहे हैं। उन्होंने भगवान् महावीर का अहिंसा दर्शन स्वयं के जीवन से जन-जन तक पहुँचाया। उनकी अन्तर्दृष्टि जाग्रत थी। अनेक संघर्षों के बीच उन्होंने अनुशासन एवं मर्यादा को प्रतिष्ठित किया शासन श्री साध्वी मंजुरेखाजी ने कहा— 'निर्मल चारित्र आराधना के लिए सर्वात्मना समर्पित थे आचार्य भिक्षु। उन्होंने समय की हर कसौटी को हँसते-हँसते स्वीकार किया। उनका समता बल मुखरित रहा, कभी भी झुका नहीं। आने वाली कठिनाइयों को समाधानपूर्वक झेला साध्वी उदितप्रभाजी, साध्वी निर्भयप्रभाजी, साध्वी चेलनाश्रीजी ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन दक्षिण मुंबई सभा के उपाध्यक्ष दिनेश धाकड़ ने किया। आभार तेरापंथ युवक परिषद के पूर्व अध्यक्ष नितेश धाकड़ द्वारा किया गया