मैत्री का महापर्व संसार का विलक्षण उत्सव

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रोहिणी, दिल्ली।

मैत्री का महापर्व संसार का विलक्षण उत्सव

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा रोहिणी दिल्ली में महातपस्वी युगप्र‌धान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या 'शासनीश्री' साध्वी सुमन श्री जी के सान्निध्य में भगवती संवत्सरी एवं क्षमा पर्व की आराधना आध्यात्मिक उल्लास और आनन्द के साथ सम्पन्न हुई। शासनश्री साध्वी सुमन श्री जी ने महावीर के पूर्व भवों की रोमान्चक यात्रा के साथ-साथ भगवान महावीर के सम्पूर्ण जीवन वृत्त का विवेचन करते हुए बताया कि तीर्थकरों का जन्म हमारे जीवन की प्रतीक्षा हे तीर्थकारों की दीक्षा ह‌मारे जीवन की अभीप्सा है और परिनिर्वाण हमारे जीवन की समीक्षा है।
भगवान महावीर जिस युग में अवतरित हुए वो युग दासप्रथा पशुबली जातिवाद का युग था। उस समय भगवान महावीर अहिंसा के हिमालय बनकर मानव‌जाति का उद्धार करने धरती पर आये। महासती चन्दनबाला के मार्मिक प्रसंग को सुनाते हुए पूरी धर्मसभा को साध्वी श्री ने भावविभोर बना दिया। साध्वी सुरेखाजी ने जैन दर्शन में कालचक्र (आरे) का वर्णन एवं आगम युग के आचार्यों का प्रेरक जीवन चरित्र सुनाया। साध्वी मधुरलताजी ने मध्यवर्ती आचार्यों एवं तेरापंथ के यशस्वी तेजस्वी आचार्यों का जीवन व्रत प्रस्तुत किया। लगभग 200 पौषध करके धार्मिक संस्कारों की ज्योत जगा दी। रोहिणी सभा अध्यक्ष संजीव जैन तेयुप दिल्ली अध्यक्ष मनीष महनोत उत्तरी दिल्ली महिला मंडल से प्रवीणा सिंधी ज्ञानशाला प्रभारी एवं क्षेत्रीय सभाओं के पदाधिकारीगणों ने क्षमायाचना की। मंच संचालन हिम्मत राखेचा ने किया।